अयोध्या विवाद: हिंदू पक्षकार के वकील ने रामलला को नाबालिग बताकर कहा- रामलला की संपत्ति छीन नहीं सकते’।

वैद्यनाथन ने कहा कि जब संपत्ति भगवान में निहित होती है तो कोई भी उस संपत्ति को ले नहीं सकता और उस संपत्ति से ईश्वर का हक नहीं छीना जा सकता।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : अयोध्या केस पर सुनवाई जारी है इसमें पक्ष और विपक्ष की दलीलें भी लगातार जारी हैं। अयोध्‍या केस की 9वें दिन की सुनवाई में रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि विवादित भूमि पर मंदिर रहा हो या न हो, मूर्ति हो या न हो लोगों की आस्था होना काफी है यह साबित करने के लिए कि वही रामजन्म स्थान है। वैद्यनाथन ने कहा कि जब संपत्ति भगवान में निहित होती है तो कोई भी उस संपत्ति को ले नहीं सकता और उस संपत्ति से ईश्वर का हक नहीं छीना जा सकता। ऐसी संपत्ति पर एडवर्स पजेशन का कानून लागू नहीं होगा। रामलला के वकील ने कहा कि मंदिर में विराजमान रामलला कानूनी तौर पर नाबालिग का दर्जा रखते हैं। नाबालिग की संपत्ति किसी को देने या बंटवारा करने का फैसला नहीं हो सकता। हज़ारों साल से लोग जन्मस्थान की पूजा कर रहे हैं। इस आस्था को सुप्रीम कोर्ट को मान्यता देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1949 में विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति पाए जाने के बाद 12 साल तक दूसरा पक्ष निष्क्रिय बैठा रहा। उन्हें कानूनन दावा करने का हक नहीं है। कोर्ट जन्मस्थान को लेकर हज़ारों साल से लगातार चली आ रही हिंदू आस्था को महत्व दे। इसके साथ ही रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अपनी बहस पूरी की। इस तरह निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान की बहस के बाद अब रामजन्म भूमि पुनरोद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने बहस शुरू की। उन्‍होंने कहा कि सबसे पहले धार्मिक मान्यताओं के आधार पर साबित करूंगा कि अयोध्या में जन्मभूमि पर हमेशा से मंदिर रहा है। चीफ जस्टिस ने हिंदू पक्षकार के वकील से कहा कि आस्था को लेकर कभी कोई सवाल नहीं रहा है। उन्होंने राम के जन्मस्थान को लेकर सवाल कहदा किया और कहा कि रामजन्मभूमि यही जगह है इसका सबूत दिखाइए।

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