(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई इसलिए की क्योंकि उस पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की कार्रवाई की तलवार लटक रही है। आतंकी संगठनों की मदद करने वाले देशों पर नजर रखने वाले इस संगठन ने पाकिस्तान को पहले से ही ग्रे लिस्ट में डाल रखा है। आतंकी संगठनों पर कोई कार्रवाई न करने पर भविष्य में ज्यादा कठोर निर्णय लेने की चेतावनी दे रखी है।माना जा रहा था कि अगर पाकिस्तान ने कोई कार्रवाई नहीं की तो अक्टूबर में होने वाली एफएटीएफ की बैठक में उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है। यह बात एक मीडिया रिपोर्ट में कही गई है।पेरिस से कार्यरत एफएटीएफ आतंकी संगठनों के खिलाफ पाकिस्तान के कदमों के प्रति लगातार असंतोष जता रहा था। संगठन की जांच में इन संगठनों को आर्थिक मदद मिलने के तस्वीर साफ नहीं हो रही थी। एफएटीएफ आतंकी संगठन आइएस, अल कायदा, जमात-उद-दावा, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और तालिबान से जुड़े कई आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बनाए हुए था।14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर कार्रवाई के लिए एफएटीएफ पर भारत का दबाव और बढ़ गया। आतंकी संगठनों पर कार्रवाई न करने पर पाकिस्तान पर ब्लैक लिस्ट में जाने का खतरा बना हुआ था। ब्लैक लिस्ट में जाने पर उसे विदेशी अनुदान और कर्ज मिलने में मुश्किल खड़ी हो जाती और पूंजी निवेश आकर्षित करने में भी कठिनाई होती। इससे पाकिस्तान की आर्थिक दशा और बिगड़नी तय थी।वित्त सचिव आरिफ अहमद खान फरवरी में पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक में भाग लेने गए थे। वहां से लौटकर उन्होंने सरकार को आसन्न खतरे के बारे में बताया था। इसी के बाद आतंकी संगठनों के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई शुरू की। एफएटीएफ के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के मामलों को देखने वाली क्षेत्रीय शाखा के प्रतिनिधि 24 मार्च को इस्लामाबाद आएंगे और वे हालात की समीक्षा करेंगे।पाकिस्तान की कोशिश है कि इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक से पहले जमीन पर सरकार की कार्रवाई को दिखाने और बताने वाले हालात पैदा हो जाएं। इस समीक्षा बैठक की रिपोर्ट के आधार पर एफएटीएफ फैसला करेगा कि पाकिस्तान के बारे में क्या निर्णय लेना है।