केरल सरकार ने सबरीमाला मंदिर में जबर्दस्ती घुस रही महिलाओं को सुरक्षा देने से किया इंकार।

केरल सरकार ने यह स्पष्ट किया था कि सबरीमाला मंदिर के दर्शन करने की बात कहने वाली महिला सामाजिक कार्यकर्ता को पुलिस सुरक्षा नहीं दी जाएगी।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : सबरीमाला मंदिर में जबरदस्ती प्रवेश की इच्छुक महिलाओं को लिए बुरी खबर आई है। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह मामला शीर्ष अदालत की 7 जजों की बेंच को सौंपा जाएगा। इस पर सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सबरीमाला पर दिए फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई है। सरकार हमें सुरक्षा मुहैया कराए या नहीं, लेकिन हम वहां जाएंगे। जो यह कहते हैं कि हमें पुलिस सुरक्षा के लिए कोर्ट से आदेश लाना चाहिए। असल में वे कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। इससे पहले, केरल सरकार ने यह स्पष्ट किया था कि सबरीमाला मंदिर के दर्शन करने की बात कहने वाली महिला सामाजिक कार्यकर्ता को पुलिस सुरक्षा नहीं दी जाएगी। केरल देवस्वाम मंत्री के. सुरेंद्रन ने कहा, “यह प्रदर्शन करने का स्थान नहीं है। यहां पर तृप्ति देसाई जैसी कार्यकर्ताओं के लिए अपनी ताकत दिखाने के लिए कोई जगह नहीं है। हम उन्हें अंदर नहीं ले जाएंगे। वे कोर्ट का आदेश लेकर आएं।” मंत्री सुरेंद्रन ने कहा- केरल सरकार ने सबरीमाला मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को बेहतर तरीके से समझने के लिए कानूनी सलाह मांगी है। पहले की स्थिति अलग थी, जब सुप्रीम कोर्ट का एक मजबूत फैसला था। इसमें सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी। हालिया स्थिति अलग है। इस मामले की सुनवाई एक बड़ी पीठ को सौंपी गई है।” केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को सबरीमाला पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में कानूनी सलाह लेने का निर्णय लिया था। विजयन ने कहा था, “सुप्रीम कोर्ट जो कहेगा सरकार उसे लागू करेगी। हम समझते हैं कि 28 सितंबर 2018 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी भी लागू है, लेकिन इस फैसले का निहितार्थ स्पष्ट नहीं हैं। हमें विशेषज्ञ की राय लेनी होगी। इसके लिए हमें और समय की आवश्यकता होगी।” इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने गुरुवार को सबरीमाला केस में पुनर्विचार याचिका 3:2 के बहुमत से सुनवाई के लिए 7 जजों की बेंच को भेजी। चीफ जस्टिस गोगोई, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस एएम खानविलकर ने केस बड़ी बेंच को भेजने का फैसला दिया। जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इस पर असहमति जताते हुए आदेश जारी किया था। हालांकि, इस आदेश में 2018 में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने पर रोक नहीं लगाई गई।

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