कैसे डेढ़ दशक बाद हुआ इस्लामिक स्टेट का खात्‍मा

इराक और सीरिया के तिहाई इलाके को अपने कब्जे में करने के बाद 2014 में आइएस के सरगना अबू बकर अल-बगदादी ने खुद को खलीफा और सीरिया में खलीफा शासन की घोषणा की थी।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : अमेरिका समर्थित बलों ने सीरिया से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) का पूरी तरह से सफाया होने की घोषणा कर दी है। सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) के मुताबिक आइएस के कब्जे वाले आखिरी इलाके बघौज को भी स्वतंत्र करा लिया गया है। एसडीएफ की तरफ से खलीफा के कथित शासन के अंत की घोषणा भी कर दी गई है। इराक और सीरिया के तिहाई इलाके को अपने कब्जे में करने के बाद 2014 में आइएस के सरगना अबू बकर अल-बगदादी ने खुद को खलीफा और सीरिया में खलीफा शासन की घोषणा की थी। हालांकि माना ये भी जा रहा है कि बगदादी अब भी इराक में ही कहीं छिपा बैठा है। वहीं उसके कुछ आतंकी सीरिया के रेगिस्तानी इलाके व इराक के कुछ शहरों में छुपे हैं और समय-समय पर वारदातों को अंजाम देते हैं। लिहाजा आईएस का खतरा अब भी बरकरार है। वर्षो से जारी संघर्ष के दौरान एसडीएफ के करीब 11000 लड़ाके मारे गए। मानवाधिकार के लिए सीरियाई प्रेक्षक के मुताबिक, कई हफ्तों तक भीषण युद्ध में 630 नागरिक और करीब 1600 आइएस के आतंकी भी मारे गए हैं।आईएस के उदय की कहानी इराक में सद्दाम हुसैन के खात्‍मे से शुरू हुई थी। एक लंबी लड़ाई के बाद अमेरिका इराक को सद्दाम हुसैन के चंगुल से आजाद करा चुका था, पर इस आजादी को हासिल करने के दौरान इराक पूरी तरह बर्बाद हो चुका था। अमेरिकी सेना के इराक छोड़ते ही बहुत से छोटे-मोटे गुट अपनी ताकत की लड़ाई शुरू करने लगे। उन्हीं में से एक गुट का नेता था अबू बकर अल बगदादी। यह अल-कायदा इराक का प्रमुख था। वह 2006 से ही इराक में अपनी जमीन तैयार करने में लगा था।संसाधनों की कमी के चलते तब बगदादी ज्यादा कामयाब नहीं हो पा रहा था। हालांकि इराक पर कब्जे के लिए तब तक उसने अल-कायदा इराक का नाम बदल कर नया नाम आइएसआइ यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक रख लिया।गदादी ने सद्दाम हुसैन की सेना के कमांडर और सिपाहियों को अपने साथ मिला लिया। इसके बाद उसने शुरुआती निशाना पुलिस, सेना के दफ्तर और चेकप्वाइंट्स को बनाना शुरू किया। अब तक बगदादी के साथ कई हजार लोग शामिल हो चुके थे। फिर भी बगदादी को इराक में वो कामयाबी नहीं मिल रही थी। लिहाजा उसने सीरिया का रुख करने का फैसला किया। सीरिया तब गृह युद्ध ङोल रहा था।पहले चार साल तक सीरिया में भी बगदादी को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली। इस दौरान उसने एक बार फिर से अपने संगठन का नाम बदल कर अब आइएसआइएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) कर दिया था। जून 2013 को फ्री सीरियन आर्मी के जनरल ने पहली बार सामने आकर दुनिया से अपील की थी कि अगर उन्हें हथियार नहीं मिले तो वो बागियों से जंग एक महीने के अंदर हार जाएंगे।इस अपील के हफ्ते भर के अंदर ही अमेरिका, इजरायल, जॉर्डन, तुर्की, सऊदी अरब और कतर ने फ्री सीरियन आर्मी को हथियार, पैसे, और ट्रेनिंग की मदद देनी शुरू कर दी।

इन देशों ने बाकायदा सारे आधुनिक हथियार, एंटी टैंक मिसाइल, गोला-बारूद सब कुछ सीरिया पहुंचा दिया। यहीं से आइएसआइएस के दिन पलट गए। दरअसल जो हथियाऱ फ्री सीरियन आर्मी के लिए थे, वो साल भर के अंदर आइएसआइएस तक जा पहुंचे क्योंकि तब तक आइएस फ्री सीरियन आर्मी में सेंध लगा चुका था और उसके बहुत से लोग उसके साथ हो लिए थे।
आइएसआइएस ने अब सीरिया और इराक के एक बड़े हिस्से पर अपना कब्जा जमा लिया था। इनमें इन दोनों देशों के कई बड़े शहर भी शामिल थे। जून 2014 से आइएसआइएस ने इराक और सीरिया में जो कहर बरपाना शुरू किया वो आजतक बदस्तूर जारी रहा। आइएसआइएस के आतंकवादी इराक और सीरिया के कई अहम शहरों पर कब्ज़ा कर चुके थे। वे इन इलाकों में अपनी सरकार चला रहे थे। आइएस ने सीरिया के रक्का, पामयेरा, दियर इजौर, हसाक्का, अलेप्पो, होम्स, यारमुक और इराक के रमादी, अनबार, तिकरित, मोसुल, फालुजा जैसे शहरों को अपने कब्जा में किया हुआ था।जून, 2017 में आइएस को बड़ा झटका लगा। लंबी लड़ाई के बाद मोसूल इससे मुक्त हो गया। धीरे-धीरे आइएस के हाथ से एक एक करके इलाके छूटते गए। उसका प्रभाव क्षेत्र सिकुड़ता गया। 2018 में सीरियाई सरकार ने दमिश्क के दक्षिण में यारमुक में और इजरायली-कब्जे वाले गोलन हाइट्स के साथ सीमांत पर आइएस का घेराव किया।

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