चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो देश में लोकसभा विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पदों के चुनाव करने के लिए अधिकृत है. जनवरी फरवरी में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद ईवीएम पर उठे शक और सवालों के बीच आयोग पर कुछ राजनीतिज्ञों ने पक्षपात करने के आरोप लगाए थे. जहां एक ओर बीएसपी जैसी पार्टी ने बैलेट से चुनाव कराने की मांग की थी वहीं कांग्रेस कई मामलों को लेकर अदालत चली गई. लेकिन सबसे तीखे हमले आम आदमी पार्टी की ओर से हुए. इसमें पार्टी ने पारंपरिक मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए. अरविंद केजरीवाल ने तो चुनाव आयोग को धृतराष्ट्र तक कह डाला.
बता दें कि लगातार महीने भर तक इस प्रकार के आरोप लगाने के बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम चैलेंज नाम का कार्यक्रम भी रखा. इस कार्यक्रम में चुनाव आयोग ने सभी दलों को आमंत्रित किया और चैलेंज दिया कि वे ईवीएम को हैक कर दिखाएं या फिर साबित करें कि उनके आरोप सही हैं. इस चैलेंज में केवल लेफ्ट और एनसीपी के दल पहुंचे जिन्होंने बाद में यह कहा कि वे प्रक्रिया समझने आए थे. कुल मिलाकर चुनाव आयोग के कार्यक्रम में कोई दल अपनी बात साबित नहीं कर सका और एक बार फिर चुनाव आयोग ने साफ कहा कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ संभव नहीं है.