जानिए दो साल पहले भारतीय सैनिकों ने कैसे की थी सर्जिकल स्ट्राइक

देश के सैन्य इतिहास में यह घटना अपने आप में अविस्मरणीय मानी गई, क्योंकि पहली बार किसी सरकार ने इस तरह से पाकिस्तान की बर्बरता का बदला लेने की हिम्मत दिखाई थी

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ)  : 18 सितंबर, 2016 को जम्मू-कश्मीर के उड़ी में भारतीय सेना के कैंप पर पाकिस्तानी सेना ने हमला किया। इसका बदला लेते हुए 28 सितंबर की रात को भारतीय सेना के जांबाजों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर सात आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। देश के सैन्य इतिहास में यह घटना अपने आप में अविस्मरणीय मानी गई, क्योंकि पहली बार किसी सरकार ने इस तरह से पाकिस्तान की बर्बरता का बदला लेने की हिम्मत दिखाई थी।

सीमा पार आतंकियों के कैंप में बढ़ी सक्रियता पर एक सप्ताह पहले खुफिया एजेंसियों की नजर थी। यह सूचना सेना से साझा की गई।

– ऑपरेशन देर रात 12.30 बजे शुरू हुआ। सेना के स्पेशल कमांडोज को सर्जिकल स्ट्राइक के लिए चुना गया।

– एमआइ-17 हेलीकाप्टरों के जरिए एलओसी पर 150 कमांडो को उतारा गया। वे गुलाम कश्मीर में तीन किमी अंदर घुसे।

– भींबर, लिपा, केल और हॉटस्प्रिंग सेक्टरों में ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इनकी लोकेशन एलओसी से 500 मीटर से दो किमी के बीच थी।

– ऑपरेशन में आतंकियों के सात कैंप तबाह किए गए। 38 आतंकी और दो पाकिस्तानी जवान ढेर। सभी भारतीय कमांडोज सुरक्षित वापस लौटे। सुबह 4.30 बजे ऑपरेशन खत्म।

– पूरे ऑपरेशन की निगरानी तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और डीजीएमओ रणवीर सिंह ने की।

कश्मीर में सीमा रेखा से लगे उड़ी जिले में 18 सितंबर, 2016 को सुबह 5.30 बजे चार आतंकियों ने भारतीय सेना के कैंप पर हमला किया। इस हमले में 18 सैनिक शहीद हुए। यह हमला भारतीय सेना पर दो दशकों में हुए सबसे घातक हमलों में से एक था। सेना ने कुछ घंटों की मुठभेड़ में चारों आतंकियों को मार गिराया लेकिन पाकिस्तान को सबक सिखाया जाना बाकी था। इस कायराना हमले का बदला लेने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया।सेना को खुफिया एजेंसियों से सूचना मिली थी कि घुसपैठ करने की फिराक में आतंकी एलओसी के पास इकट्ठा हुए हैं। ये जम्मू-कश्मीर व मेट्रो शहरों को निशाना बना सकते हैं। ऐसे में सर्जिकल स्ट्राइक ही इनके खात्मे का एकमात्र विकल्प था।भारत ने काफी सुनियोजित और सटीकता से सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। इसके लिए दस दिनों से खुफिया जानकारी जुटाई जा रही थी। आतंकियों के ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही थी। यही वजह थी कि स्ट्राइक के दौरान सेना को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची।

सीमित सैन्य कार्रवाई की लंबी दास्तान

कश्मीर (1971) : देश की स्पेशल फोर्स और घातक प्लाटून ने सीमा रेखा से लगे इलाके में सामरिक अभियान चलाया। इससे सीमा के उस पार कम लेकिन प्रभावी नुकसान हुआ।

म्यांमार (अप्रैल-मई 1971) : भारत और म्यांमार ने मिलकर संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जिसके तहत बर्मा-मिजोरम सीमा से आर-पार जा रहे विभिन्न आतंकी संगठनों के तकरीबन 200 आतंकियों को रोका गया। ये आतंकी बांग्लादेश से हथियारों का जखीरा उठाकर मणिपुर की तरफ जा रहे थे।

 भूटान (2003) : भारतीय सेना ने भूटान के अंदर मौजूद पूर्वोत्तर के आतंकी संगठनों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन ऑल क्लीयर नामक अभियान चलाया। इसके तहत करीब 30 आतंकी कैंपों को निशाना बनाया गया और 650 आतंकियों का सफाया हुआ।म्यांमार (2006 व 2015) : जनवरी, 2006 में भारतीय सेना ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाया और जून, 2015 में भारतीय कमांडोज ने म्यांमार के जंगलों में सर्जिकल स्ट्राइक की। 4 जून, 2015 को मणिपुर में नगा आतंकियों द्वारा 18 भारतीय सैनिकों की जान लेने के बाद यह स्ट्राइक की गई।

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