(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : दुनिया में शान्ति और अहिंसा का संदेश देने वाले महात्मा गांधी की आज 149वीं जयंती है। इस मौके पर केवल भारत में नहीं बल्कि पूरे विश्व में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद किया जा रहा है। दुनिया में शान्ति का सन्देश देने वाले महात्मा गांधी को विश्व शान्ति के लिए दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार नोबेल कभी नहीं मिला। हालांकि नोबल के शान्ति पुरस्कार के लिए उन्हें पांच बार नामित किया गया। साल 1937, 1938, 1939, 1947 और उनकी मृत्यु से कुछ समय बाद 1948 में इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया।महात्मा गांधी को पहली बार नॉर्वे की संसद के डिप्टी मेंबर ओले कॉलओंसेन ने 1937 में नामित किया था। इसके बाद ओले कॉलओंसेन ने ही 1938 और 1939 में भी शान्ति के नोबेल के लिए गांधीजी को नामित किया। लेकिन उनको यह पुरस्कार नहीं मिल सका।1947 में गोविन्द बल्लभ पंत, जीवी मावलंकर और बी खेर ने महात्मा गांधी को नामित किया। लेकिन इस बार भी उनको पुरस्कार नहीं मिला।30 जनवरी 1948 को गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 1948 में उन्हें ऐमिली ग्रीन (1946 की नोबेल शांति पुरस्कार की विजेता), क्रिस्चियन स्टेफनसेन ओफ्तेदल, अमेरीकन फ्रेंड्स सर्विस कमेटी सहित 6 लोगों ने नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया था। महात्मा गांधी को मरणोपरांत नोबल पुरस्कार देने पर विचार किया गया। उस वक़्त तक किसी को भी मरणोपरांत पुरस्कार नहीं दिया गया था। नोबेल पुरस्कार फाउंडेशन के नियम के मुताबिक किस व्यक्ति को मरने के बाद पुरस्कार दिया सकता था। इस बात पर तमाम चर्चा और विमर्श हुए।आखिरकार 18 नवंबर 1948 को नॉर्वे की नोबेल कमेटी ने किसी भी जीवित व्यक्ति को इस सम्मान के लिए योग्य नहीं पाया और इस स्थिति में 1948 में शान्ति का पुरस्कार नहीं दिया गया। 1989 में जब दलाई लामा को नोबेल के शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया, तब नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति ने महात्मा गांधी को नोबेल न दिए जाने को चूक के रूप में स्वीकार कर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया।