पारंपरिक वस्तुओं को जीवंत करने के लिए एक नई पहल, प्लास्टिक की जगह कुल्हड़ की शुरूआत !

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : शिमला। आधुनिकता के युग में जहां लोगों की जीवनशैली में काफी बदलाव आया है और इसके चलते लोग पारंपरिक वस्तुओं को भुलाकर आधुनिकता के रंग में रंग गए हैं। इस बदलते परिवेश में शिमला के नरेश शर्मा ने पारंपरिक वस्तुओं को जीवंत करने के लिए एक नई पहल की शुरूआत की है। नरेश शर्मा शिमला के चौड़ा मैदान में प्लास्टिक की वस्तुओं को दरकिनार कर पारंपरिक कुल्हड़ में पेयजल व खाना परोसने का नया कॉन्सैप्ट लेकर आए हैं। उनके द्वारा की गई यह पहल स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटकों को भी खूब पसंद आ रही हैं। समय के साथ-साथ प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के इस्तेमाल का प्रचलन भी बढ़ गया है लेकिन अब प्लास्टिक से होने वाले नुक्सान के प्रति जागरूकता के चलते जनता भी प्लास्टिक से परहेज करना चाहती है और इसी बीच नरेश शर्मा ने कुल्हड़ में खाद्य व पेयजल को परोसने की पहल की है, जिसे काफी सराहा जा रहा है। मिट्टी से तैयार बर्तनों में दी जा रही खाद्य वस्तुएं जहां पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करेंगी वहीं लोगों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी। प्रदेश सरकार ने भी प्लास्टिक के कैरी बैग के अलावा प्लास्टिक से बने कप व प्लेट्स पर भी पाबंदी लगा दी है, ऐसे में नरेश शर्मा द्वारा कुल्लड़ में चाय व अन्य खाद्य सामग्री परोसे जाने की एक अच्छी शुरूआत व पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए एक अच्छा कदम साबित होगी। रविवार को मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी डा. साधना ठाकुर ने इसका उद्घाटन कर लोगों से आह्वान किया कि लोग प्लास्टिक का बहिष्कार कर पारंपरिक मिट्टी से बने बर्तनों व अन्य बायोडिग्रेडेबल वस्तुओं का इस्तेमाल करें ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।

Comments (0)
Add Comment