नई दिल्ली। भारत अपने पुराने मित्र देश युद्धाभ्यास कर रहा है। शुक्रवार को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक युद्धाभ्यास की शुरुआत व्लाडीवोस्टक में शुरू की गई। यह पहला मौका है जब रूस के साथ युद्धाभ्यास में दोनों देशों की तीनों सेना (सेना, नौसेना और वायुसेना) हिस्सा ले रहे हैं। जानकारी के मुताबिक यह युद्धाभ्यास आतंक के खात्मे के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। बता दें कि यह युद्धाभ्यास जापान सागर में दस दिनों तक चलेगा और इसको ‘इंद्र-2017’ का कोड नाम दिया गया है।
रक्षा मंत्रालय की ओर से आए बयान में बताया गया कि दोनों मित्र देशों का संयुक्त युद्धाभ्यास साझा चुनौतियों से निपटने की क्षमताओं में बढ़ोतरी करना है। बयान के मुताबिक इस युद्धाभ्यास में लगभग 450 भारतीय और 1000 से अधिक रूसी सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। शनिवार को युद्धाभ्यास उद्घाटन समारोह में दोनों देशों के सेना के तीनों अंगों ने मार्च पास्ट किया, जबकि भारतीय सैनिकों ने पारंपरिक मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया। भारतीय टास्क फोर्स के कमांडर मेजर जनरल एनडी प्रसाद ने बताया कि यह अभ्यास दोनों देशों के बीच लगातार जारी रणनीतिक साझेदारी का परिचायक होगा। प्रसाद ने कहा कि आतंक रोधी अभियान में तेजी लाने के लिए दोनों देशों के अनुभव साझा क्षमता बढ़ाने में सहायक होंगे।
वहीं दूसरी ओर से ईस्टर्न मिलिट्री डिस्टि्रक्ट (रूसी संघ) के चीफ ऑफ स्टॉफ लेफ्टिनेंट जनरल सोलोमाटिन की ओर से आए बयान में कहा गया कि साझा सैन्य अभ्यास से दोनों देशों की सेनाओं के संबंध तो मजबूत होंगे ही, बल्कि इससे उनकी क्षमताओं में भी बेहतरी आएगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के 70 साल पूरा होने के मौके पर आयोजित अभ्यास के दूरगामी लाभ दिखाई देंगें। बता दें कि यह युद्धाभ्यास जापान सागर में दस दिनों तक चलेगा और इसको ‘इंद्र-2017’ का कोड नाम दिया गया है।