बजट 2017 से भारत के मध्य वर्ग और सेमी-अर्बन इलाके में रहने वाले लोगों को काफी उम्मीदें हैं। नोटबंदी के बाद इन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली मिडल क्लास को राहत पहुंचाने के लिए कई उपाय कर सकते हैं। हालांकि यह केवल राहत देने की बात नहीं है, बल्कि राहत मिलीं तो बचत, निवेश और ग्रोथ पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। यहां जानिए ऐसी 10 कदम जो मिडल क्लास को राहत देने के लिए उठाए जा सकते हैं।
1. कर योग्य आय की न्यूनतम सीमा को बढ़ाना: फिलहाल 2.5 लाख रुपये से अधिक की इनकम टैक्स के दायरे में है। अगर इस न्यूनतम सीमा को बढ़ाया जाए तो एक बड़े वर्ग को राहत मिलेगी।
2. टैक्स स्लैब का पुनर्गठन: अभी 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसदी, 5 लाख से 10 लाख तक पर 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। वित्त मंत्री चाहें तो खासतौर से पहले दो स्लैब का दायरा बढ़ा सकते हैं या कम दर पर टैक्स ले सकते हैं।
3. भत्तों पर छूट की सीमा बढ़ाना: सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को विभिन्न भत्तों पर टैक्स में छूट मिलती है। इसमें बच्चों की शिक्षा, कन्वेंस, मेडिकल रीइंबर्समेंट, हाउस रेंट और लीव ट्रैवल जैसे भत्ते शामिल हैं। इन भत्तों पर काफी समय पहले लिमिट फिक्स की गई थी। अब महंगाई को देखते हुए इसमें संशोधन किया जा सकता है।
4. सेक्शन 80-सी के तहत कटौती बढ़ाना: वर्तमान में सेक्शन 80-सी के तहत 150,000 से लेकर 300,000 तक आयकर में कटौती की जा सकती है। अगर वित्त मंत्री इसकी सीमा बढ़ाते हैं तो लोगों की सेविंग्स बढ़ेंगी और ग्रोथ को ताकत मिलेगी।
5. वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा को बढ़ाना: अभी वरिष्ठ नागरिकों को (60 से 80 साल) 300,000 रुपये तक और सुपर वरिष्ठ नागरिकों (80 साल से अधिक) को 500,000 रुपये तक की आय पर छूट मिलती है। वित्त मंत्री इसे 400,000 और 650,000 रुपये तक कर सकते हैं।
6. इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड पर कटौती: इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में किए गए निवेश पर भी कटौती को फिर से लागू किया जा सकता है। 20,000 रुपये या निवेश की गई वास्तविक रकम, दोनों में से जो भी कम हो पर कटौती के पुराने नियम को फिर से लागू किया जा सकता है।
7. एनपीएस निवेश पर अधिक प्रोत्साहन: जेटली नैशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश करने वाले करदाताओं को अधिक प्रोत्साहन दे सकते हैं। सेक्शन 80सीसीडी (1बी) पर कटौती सीमा को 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख तक कर सकते हैं। एनपीएस को कर्मचारी भविष्य निधि या पब्लिक प्रविडेंट के समकक्ष ला सकते हैं। इसके तहत कुछ शर्तों के अधीन 100 फीसदी राशि के निकासी की सुविधा दी जा सकती है।
8. होम लोन पर ब्याज दर में छूट: पीएम ने हाल में शहरी क्षेत्रों में 9 लाख रुपये के होम लोन पर 4 प्रतिशत और 12 लाख के होम लोन पर 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने की घोषणा की है। हालांकि यह राहत टायर-3 के शहरों के लिए है। बजट 2017 में बड़ी रकम पर ब्याज सब्सिडी की घोषणा लोगों को राहत दे सकती है।
9. होम लोन ईएमआई पर अधिक कटौती की अनुमति: फिलहाल होम लोन पर 2,00,000 रुपये तक की कटौती मान्य है। प्रिंसिपल रीपेमेंट पर 1.50 लाख रुपये तक की कटौती का दावा किया जा सकता है। इन दोनों ही मामलों में कटौती की सीमा बढ़ाई जा सकती है।
10. होम लोन ईएमआई पर जल्दी कटौती की अनुमति: होम लोन के इंट्रेस्ट पर कटौती फिलहाल खरीदार को संपत्ति का अधिकार मिलने के बाद होती है। इसका मतलब यह है कि होम लोन लेने और आईएमआई का भुगतान करना शुरू करने के सालों बाद खरीदार को फायदा मिलता है। इस कटौती को पहली ईएमआई के भुगतान के साथ ही शुरू किया जा सकता है।