भारत को स्पेशल स्ट्रैटेजिक स्टेटस दिया अमेरिका ने, भारत की NSG सदस्यता पर रोड़े अटकाने वाले चीन को मुंहतोड़ जवाब।

चीन बीते दो साल से परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की एंट्री की राह में लगातार रोड़े अटका रहा है। चीन का तर्क है कि जब तक भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं कर देता, तब तक उसे एनएसजी की सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को एसटीए- 1 (स्ट्रैटजिक ट्रेड ऑथराइजेशन-1) का दर्जा दिया है। भारत से पहले यह दर्जा एशिया में केवल जापान और दक्षिण कोरिया को दिया गया है। यह दर्जा मिलने बाद भारत को अमेरिका से हाईटेक्नोलॉजी प्रोडक्शन जैसे अंतरिक्ष और रक्षा सेक्टर में मदद मिल सकेगी। अमेरिका का भारत को एसटीए-1 दर्जा देना चीन को जवाब माना जा रहा है। चीन बीते दो साल से परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की एंट्री की राह में लगातार रोड़े अटका रहा है। चीन का तर्क है कि जब तक भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं कर देता, तब तक उसे एनएसजी की सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शर्त रखी थी कि किसी देश को एसटीए-1 का दर्जा तभी दिया जाएगा जब वह चार प्रमुख संगठनों- एनएसजी, मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर), वासेनार अरेंजमेंट (डब्ल्यूए) और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप (एजी) का सदस्य हो। ट्रम्प प्रशासन ने भारत को एसटीए-1 दर्जा देने के लिए पूर्व नियम में ढील दे दी। वहीं, भारत एनएसजी के सिवाय अन्य तीन समूहों की सदस्यता हासिल कर चुका है। ओबामा प्रशासन के आखिरी कुछ महीनों में एनएसजी की सदस्यता हासिल करने के विफल प्रयासों के बाद भारत ने अमेरिका से एसटीए-1 की शर्तों में ढील देने को कहा था। नोटिफिकेशन में कहा गया कि भारत अमेरिका का बड़ा रक्षा सहयोगी है। वह एमटीसीआर, डब्ल्यूए और एजी समूहों का पहले से ही सदस्य है। लिहाजा उसे एसटीए-1 दर्जा दिया जा सकता है। दर्जा मिलने के बाद चीन समेत बाकी दुनिया में भारत की धाक बढ़ी है। अमेरिका के करीबी समझे जाने वाले इजरायल को भी एसटीए-1 का दर्जा नहीं दिया गया है क्योंकि वह चार प्रमुख संगठनों का हिस्सा नहीं है।

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