(न्यूज़ लाइव नाऊ) : प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के मामले में मध्यप्रदेश के गांवों की महिलाओं ने शहरी महिलाओं को पीछे छोड़ दिया है। जहां 44.7 फीसदी ग्रामीण महिलाओं के नाम मकान या जमीन है, वहीं शहरों में यह आंकड़ा महज 40.1 फीसदी है। हालांकि लगता है गांवों की महिलाओं को मोबाइल में ज्यादा रुचि नहीं। इसीलिए खुद का मोबाइल रखने वाली शहरी और ग्रामीण महिलाओं में बहुत बड़ा अंतर है।
ये अहम जानकारी मिली है नेशनल फैमिल हेल्थ सर्वे की 2015-2016 की रिपोर्ट से। जानें खास बातें और देखें इंटरेक्टिव चार्ट –
– घर-परिवार के फैसलों में अब महिलाओं का दखल बढ़ गया है। प्रदेश के शहरों की 87.7 फीसदी शादीशुदा महिलाएं जहां फैसलों में अहम भूमिका निभाती हैं, वहीं गांवों में यह आंकड़ा 80.8 है।
– गावों में ऐसी महिलाओं की संख्या ज्यादा है, जो 12 घंटे काम करती हैं और इसके बदले उन्हें नकद भुगतान होता है। शहरों में जहां ऐसी कामकाजी महिलाएं 22.1 फीसदी हैं, वहीं ग्रामीण महिलाओं की संख्या 33.5 है।
– पति के हाथों घरेलू हिंसा का शिकार होने वाली शादीशुदा महिलाओं की संख्या गावों में ज्यादा (35.4%) है। शहरों में ऐसी महिलाओं का आंकड़ा 27.3 फीसदी है। इसी तरह प्रैग्नेंट रहते घरेलू हिंसा शिकार होने वाली महिलाएं भी गांवों में ज्यादा (2.5% की तुलना में 3.6%) हैं।
– बैंक खातों के मामले में ग्रामीण महिलाएं पीछे हैं। शहरों में जहां 50.1 फीसदी महिलाओं के पास बचत खाता है और वे इस सेवा का उपयोग करती हैं, वहीं ग्रामीण महिलाओं की संख्या 31.4 फीसदी है। कुल मिलाकर प्रदेश की 37.3 महिलाओं के पास ही बैंक खाता है। 2005-06 में यह आंकड़ा 8.9 फीसदी था।
– खुद का मोबाइल रखने में ग्रामीण महिलाएं पीछे हैं। 49.5 फीसदी शहरी महिलाओं के पास पर्सनल मोबाइल है, वहीं गांवों में यह आंकड़ा केवल 19.1 फीसदी है।
– पीरियड के दौरान स्वच्छता बरतने वाले साधनों का इस्तेमाल करने में गांव पीछे हैं। शहरों की जहां 65.4 फीसदी महिलाएं ऐसे साधनों का उपयोग करती हैं, वहीं गांवों में यह आंकड़ा केवल 26.4 फीसदी है।