मप्र : नवनिर्वाचित सरकार 5 हजार किसानों के 350 करोड़ का क़र्ज़ करेगी माफ।

कर्जमाफी की उम्मीद मेंं 15 हजार किसानों ने सोसायटियों से लिया कर्ज नहीं चुकाया। पहले करीब 40 हजार किसान डिफाल्टर थे, जो अब बढ़ कर 55 हजार हो चुके हैं।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) :  सहकारी बैैंक की पहले से माली हालत खराब है और कांग्रेस ने मप्र में सरकार बनने के 10 दिनों किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद से ही किसानों ने बैंक का कर्ज चुकाना बंद कर दिया। आस में बैठे किसान अब कर्ज माफी का इंतजार कर रहे हैं। किसान अब सहकारी बैंकों के चक्कर लगाने लगे हैं। हालांकि कांग्रेस ने सरकार बनने से पहले ही कर्ज माफी की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारी सहकारी बैंकों के किसानों के कर्ज की जानकारी जुटा रहे हैं। शुक्रवार शाम तक किसानों की जानकारी भोपाल भेजनी है। कांग्रेस के नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में यह घोषणा हो सकती है। हरदा और होशंगाबाद जिले में लगभग 1.60 लाख किसान पंजीकृत हैं। कर्जमाफी की उम्मीद मेंं 15 हजार किसानों ने सोसायटियों से लिया कर्ज नहीं चुकाया। पहले करीब 40 हजार किसान डिफाल्टर थे, जो अब बढ़ कर 55 हजार हो चुके हैं। पिछले साल लिए ऋण को चुकाने के लिए 15 जून आखिरी तारीख थी। इसके पहले ही कांग्रेस मप्र में सरकार बनने पर कर्जमाफी की घोषणा कर चुकी थी। ऐसे में कई किसानों ने ऋण नहीं चुकाया।
देश के राष्ट्रीयकृत बैंकों में बकाया किसानों के कर्ज की माफी की संभावना कम है। ये बैंक भारत सरकार के अधीन हैं। भारत सरकार कर्जमाफी करे तो इन बैंकों को निर्देश जारी होने की संभावना होती है। प्रदेश सरकार के आदेश पर कर्जमाफी में प्रादेशिक बैंक में बकाया किसानों के कर्ज ही माफ होने की संभावना है। शर्तें तय होना बाकी हैं, जिसके तहत अधिकतम कितना कर्ज माफ होना है, तय सीमा से अधिक कर्ज बकाया होने पर शेष राशि जमा करने की बाध्यता रहेगी या नहीं, यह सब निर्धारित होता है। इसमें राष्ट्रीयकृत बैंकों को लेकर भी निर्णय संभव है। ऋण समाधान योजना में 80 प्रतिशत शासन को और 20 प्रतिशत संस्था यानी बैंक को वहन करने का नियम बनाया गया था। होशंगाबाद व हरदा जिले के किसानों का लगभग 200 करोड़ रुपए का मूलधन बकाया है। किसानों से सोसायटियों के जरिए आधा मूलधन जमा कर योजना का फायदा लेने के लिए प्रचार करवाया। मूलधन योजना में जमा हुआ। इसके तहत ब्याज के 80 करोड़ रुपए माफ किए जाने थे।माफ करने का प्रस्ताव जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से शासन को भेजा गया था। इसके विरुद्ध 20 करोड़ की ही स्वीकृति हुई थी और सरकार बदल गई। किसानों का कर्ज माफ करने के लिए शासन बैंक को रुपया किस ढंग से लौटाएगा यह महत्वपूर्ण है। यदि बैंक को रुपया नकद मिलता है तो बैंक की अर्थव्यवस्था दुरुस्त होगी, लेकिन रुपया यदि एकमुश्त नहीं मिला तो भविष्य में बैंक की अर्थव्यवस्था पर संकट आ सकता है। अगर कांग्रेस को वादा निभाना है तो होशंगाबाद और हरदा जिलों में कुल 55 हजार डिफाल्टर किसानों का 350 करोड़ रुपए का कर्ज माफ करना होगा। किसानों पर इतना ऋण बैंक की 22 शाखाओं में बकाया है।

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