मैनेजमेंट कॉलेजों की तरह धार्मिक – सामाजिक संस्थानों का भी सर्वे करें सर्वे एजेंसियां – PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक दिवसीय कर्नाटक दौरे पर हैं. मेंगलुरू से हेलीकॉप्टर के जरिये प्रधानमंत्री दक्षिण कन्नड़ के धर्मस्थल पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान शिव के मंजूनाथेश्वर मंदिर जाकर पूजा अर्चना किया. प्रधानमंत्री ने उजीर में जनसभा को भी संबोधित किया. पीएम मोदी ने धर्मस्थल के धर्माधिकारी ( ट्रस्टी) वीरेंद्र हेगड़े की तारीफ की.

उजीर में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पिछले सप्ताह मैं केदारनाथ गया था. आदि शंकराचार्य जी ने कितनी बड़ी भव्य साधना की होगी आज मुझे फिर एक बार दक्षिण की तरफ मंजुनाथेश्वर के शरण में आने का मौका मिला. मैं नहीं मानता हूं कि नरेन्द्र मोदी नाम के किसी शख्स को डॉक्टर वीरेन्द्र हेगड़े के सम्मान में कोई बात कहने का हक है. उन्होंने ‘वन लाइफ, वन मिशन’ में अपने आप को समर्पित किया. उनका सम्मान करने के लिए मैं व्यक्ति के तौर पर बहुत छोटा हूं. यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज धर्मस्थल आकर आपके दर्शन करने का सौभाग्य मिला. आज मुझे एक बार फिर दक्षिण के तरफ मंजू के चरणों में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

 सवा सौ करो़ड़ देशवासियों के प्रतिनिधि के रूप में जिस पद पर मुझे बैठाया गया है. उस पद की गरिमा के लिए आचार – विचार , मन – कर्म – वचन में एकसूत्रता लाने की कोशिश करता हूं. उस लक्ष्य की प्राप्ति स्व के लिए नहीं बल्कि वयम के लिए करता हूं. हर कदम को कसौटी में कसना चाहता है. मैं आदरपूर्वक आपको अभिनंदन करता हूं. मुझे सम्मान करने का सौभाग्य मिला है. हेगड़े जी को जितने बार मिला हैं, चेहरे पर मुस्कुराहट नजर आती है. जैसे गीता में कहा है निष्काम योग. यह उनके जीवन यात्रा से भी पता चलता है.

मैं जब हेगड़े जी को सम्मानित कर रहा था , तो उन्होंने कहा – पचास साल पूरे हो रहे इसका सम्मान नहीं है बल्कि आगे पचास साल तक सेवा करूं यह गारंटी मुझे चाहिए. उन्होंने अनंत हेगड़े के काम -काज की प्रशंसा करते हुए बताया कि चाहे विषय योग शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास का हो, डा वीरेन्द्र हेगड़े ने अपने चिंतन के द्वारा , कौशल के द्वारा आगे बढ़ाया है. कई राज्यों में और देश भर में स्किल डेवलेपमेंट के जितने काम चल रहे. उसके बहुत सारे मॉडल डॉक्टर वीरेंद्र हेगड़े जी के काम से प्रेरित है.

भारत जैसे देश में जब सबसे ज्यादा युवा हैं. उस देश में स्किल डेवलेपमेंट हैं – पेटपूजा के लिए नहीं बल्कि हुनर को प्राप्त करने के लिए है. ये चीज डॉ. वीरेन्द्र हेगड़े ने बहुत पहले ही करना शुरू कर दिया था. हमारे यहां तीर्थ क्षेत्र कैसे होने चाहिए, संप्रदाय – परंपराएं का लक्ष्य क्या होना चाहिए. उस विषय में जितना अध्ययन होना चाहिए. दुर्भाग्य से उतना नहीं हो पाया है.देश में जितने मैनेजमेंट संस्थान चलते हैं, तो उसकी रैंकिग होती है. मैं दुनिया की बड़ी – बड़ी सर्वे एजेंसी व मैगजीन को निमंत्रण देता हूं. धार्मिक – सामाजिक संस्थानों का भी सर्वे करें.

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