यातायात नियमों संबंधी नया विधेयक पारित, बिना लायसेंस ड्राइविंग करने पर होगा 5000 का जुर्माना।

नए कानून में शराब पीकर वाहन चलाने पर दो हजार रुपये की जुर्माना राशि को बढ़ाते हुए इसे दस हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं मोबाइल फोन पर बात करने पर एक हजार की जगह पांच हजार का जुर्माना देना होगा।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : अब शराब पीकर या फिर मोबाइल से बात करते समय ड्राइविंग करना आपके लिए महंगा साबित हो सकता है। सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब सख्‍त कदम उठाने जा रही है। इसके अलावा परिवहन और यातायात विभाग में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार को राेकने के लिए कई कदम उठाने की योजना है। इस बाबत मोटर यान (संशोधन) विधेयक 2017 में तमाम उपाय किए गए हैं। लंबी जद्दोजहद के बाद ये विधेयक दोनों सदनाें में पारित हो चुका है। राष्‍ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून अमल में आ जाएगा। आइए जानते हैं कि आखिर इस विधेयक में क्‍या खास है। नए कानून में शराब पीकर वाहन चलाने पर दो हजार रुपये की जुर्माना राशि को बढ़ाते हुए इसे दस हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं मोबाइल फोन पर बात करने पर एक हजार की जगह पांच हजार का जुर्माना देना होगा। बिना लाइंसेंस वाहन चलाने पर पांच सौ की जगह पांच हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा रेड लाइट जंप करना या सीट बेल्‍ट नहीं बांधने पर एक हजार का जुर्माना देना होगा। मोटर साइकिल पर बिना हेल्‍मेट पहने पकड़े गए तो एक हजार रुपये भरने होंगे। इतना ही नहीं नाबालिग के वाहन चलाने पर उसके अभिभावक को 25 हजार रुपये का दंड देना होगा। इसके अलावा तीन साल की सजा का भी प्रावधान है। पीड़ित की मौत की स्थिति में अब दस गुना क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। सभी अपराधों में जुर्माने की राशि में हर साल दस फीसद का इजाफा किया जाएगा। सड़क दुर्घटना में मौत मामले में वाहन चालक को दो साल की जगह सात साल की सजा होगी। जबकि, हिट एडं रन मामले में जुर्माने की राशि 25 हजार से बढ़ाकर दो लाख रुपये की होगी। देश में प्रतिवर्ष होने वाली सड़क दुर्घटनाएं सरकार और आमजन के लिए चिंता का विषय है। यह दुर्घटनाएं राजमार्गों पर अधिक हो रही हैं। यदि तीन वर्षों के सड़क हादसों पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2015 में पांच लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं। इसमें एक लाख 46 हजार लोग मौत के शिकार हुए। वर्ष 2016 में चार लाख 80 हजार सड़क दुर्घटनाएं हुईं, इसमें एक लाख 50 हजार लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह से वर्ष 2017 में चार लाख 60 हजार घटनाएं हुईं, इसमें एक लाख 46 हजार लोग बेवजह मौत के शिकार हुए।

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