ये है भारत की पहली शीशे की छत वाली ट्रेन !

किसी जगह की ट्रिप का मजा और भी दुगुना हो जाता है, जब सफर सुकूनभरा होता है। पिछले एक दशक से यात्रियों के सफर को सुकूनभरा बनाने के लिए सरकार काफी कदम उठा रही है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : किसी जगह की ट्रिप का मजा और भी दुगुना हो जाता है, जब सफर सुकूनभरा होता है।  पिछले एक दशक से यात्रियों के सफर को सुकूनभरा बनाने के लिए सरकार काफी कदम उठा रही है।  देश भर के शहरों को छोटे कस्बे और गांवों से जोड़ने का काम तेजी से हो रहा है।  होली और दिवाली जैसे कई त्योहारों पर स्पेशल ट्रेन और बस चलाई जाती है।  इसी तरह अब मुंबई से गोवा का सफर और भी दिलचस्प हो जाएगा।  18 सितंबर से दादर और मडगांव के बीच चलने वाली जन शताब्दीट एक्सलप्रेस में एक विस्टािडोम (ग्लास-टॉप) कोच शुरू किया जाएगा। एसी विस्टाडोम ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्री इस विशेष कोच में रोटेटेबल कुर्सियों पर बैठेंगे।  साथ ही इसमें मनोरंजन के लिए हैंगिंग एलसीडी टीवी भी है।  40 सीटों वाले इस कोच की लागत 3। 38 करोड़ रुपये है।  इस ट्रेन में 360 डिग्री पर घूमने वाली चौड़ी सीटें हैं, जिससे सफर में बाहर के नजारों का बेहतरीन अनुभव मिलेगा। इस खास कोच को सितंबर के पहले हफ्ते में केंद्रीय रेलवे ने अपने मुख्यालय छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर रिसीव किया था।  जानकारी के अनुसार मॉनसून में यह ट्रेन सप्तामह में तीन दिन चलेगी और मॉनसून खत्म होने के बाद सप्ताह में पांच दिन चलेगी।  जन शताब्दी एक्सप्रेस के दादर से चलने का समय सुबह 5। 25 बजे है और यह उसी दिन शाम 4 बजे तक मडगांव पहुंच जाती है। विस्टाडोम कोचों को चेन्नई की द इंटीग्रल कोच फैक्ट्री  में बनाया गया है।  इन कोचों का किराया शताब्दी एक्सप्रेस के एक्जीयक्यूटिव क्लास जितना होगा।  मूल किराए के अतिरिक्त रिजर्वेशन चार्ज, जीएसटी और कोई अन्य‍ चार्ज जोड़ा जा सकता है।  उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई कंसेशन (छूट) नहीं मिलेगा और सभी यात्रियों को पूरा किराया देना होगा।  इसकी न्यूनतम यात्रा दूरी 50 किलोमीटर होगी। ‘विस्टाडोम कोच देश में पहली बार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किए जा रहे हैं।  जिससे मुंबई या गोवा घूमने के अलावा लोग इस ट्रेन का सफर भी यात्रियों को दिलचस्प लग सके।  

 

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