लाखों रुपए कमा रही पत्नी भरण-पोषण पाने की अधिकारी नहीं है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : लाखों रुपए कमा रही पत्नी भरण-पोषण पाने की अधिकारी नहीं है। यह आदेश पारिवारिक न्यायालय की न्यायाधीश कुमारी रिंकू ने पत्नी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। अदालत ने इस मामले में वादिनी के दोनों बच्चों को 5-5 हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश भी दिया है। इसमें लड़के के बालिग होने तक तथा लड़की के शादी होने तक पति भरण-पोषण की रकम अदा करेगा। साथ ही अदालत ने पत्नी की तलाक याचिका को भी भी मंजूर करते हुए पति-पत्नी को अलग-अलग रहने की मंजूरी दे दी है।
प्रकरण के अनुसार लक्सा निवासिनी माधुरी पाठक की शादी 2 दिसम्बर 2007 को महमूरगंज के आदर्श नगर कॉलोनी निवासी रजत मोहन पाठक के साथ हुई थी। शादी के बाद उसे एक पुत्री पिया और पुत्र आदी हुए। आरोप था कि शादी के बाद ससुराल वालों ने उसे और उसके दोनों बच्चों को 3 अप्रैल 2013 को मारपीट कर घर से निकाल दिया, जिसके बाद माधुरी पाठक ने अदालत में पति के खिलाफ भरण-पोषण और तलाक का अलग-अलग मुकदमा दर्ज किया। पत्नी ने खुद को बेरोजगार बताते हुए तथा पति को कई फर्मों का मालिक बताते हुए लाखों रुपए प्रतिमाह कमाने की बात कही और 5 लाख रुपये प्रति माह भरण-पोषण दिलाए जाने तथा पति से तलाक लेने की मंजूरी देने की याचना की थी। इसके साथ ही पत्नी ने पति रजत पाठक, उसके पिता राजेन्द्र मोहन पाठक, मां भारती पाठक समेत बहन और बहनोई के खिलाफ घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न समेत अन्य मुकदमे भी दर्ज कराए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच उच्च न्यायालय इलाहाबाद में मिडिएशन भी हुआ, जहां पत्नी ने 21 करोड़ रुपये की मांग कर दी। इसके बाद पति रजत मोहन पाठक ने इस मामले में अपने अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव के जरिए अदालत में आपत्ति दाखिल करते हुए कहा पत्नी माधुरी पाठक एक प्रख्यात फैशन डिजाइनर है, वह खुद लाखों रुपए महीना कमाती है और बच्चों को उससे तथा उसके परिवार से मिलने नहीं दे रही है। इसके बाबत साक्ष्य भी अदालत में पेश किया गया, जिसमें अदालत ने पत्नी को बच्चों को उसके पिता और दादा से मिलवाने का आदेश दिया था। बावजूद इसके पत्नी ने बच्चों को उनसे नही मिलवाया। जिसके बाद मुकदमों के सदमे तथा बच्चों से न मिल पाने के गम के चलते रजत के पिता को गंभीर सदमा लगा। वह गंभीर रूप से बीमार हो गए और करीब तीन माह तक अस्पताल में कोमा में रहने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। जिसके बाद पति रजत मोहन पाठक ने पत्नी के खिलाफ हाई कोर्ट में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट भी किया था। जिस पर हाई कोर्ट ने पत्नी को कंटेम्प्ट का दोषी पाते हुए 50 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दंडित भी किया था। उधर परिवार न्यायालय की न्यायाधीश ने भरण-पोषण मामले की सुनवाई के दौरान पति के साक्ष्यों के अवलोकन करने और पत्नी द्वारा अपने आरोप के बाबत कोई साक्ष्य पेश नहीं करने के मद्देनजर लाखों रुपए महीना कमा रही पत्नी को भरण-पोषण नहीं पाने का अधिकारी मानते उसकी याचिका खारिज कर दी। साथ ही पत्नी की ओर से वर्ष 2015 में दाखिल विवाह विच्छेद की याचिका को भी मंजूर करते हुए दोनों को अलग-अलग अपना जीवन यापन करने का आदेश दिया।

Comments (0)
Add Comment