वालमार्ट खरीदेगा फ्लिपकार्ट को 15 बिलियन डॉलर में

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): दुनिया की सबसे बड़ी रीटेल कंपनी वॉलमार्ट और भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के बीच डील का एलान कभी भी हो सकता है। जानकारी के मुताबिक वॉलमार्ट 15 बिलियन डॉलर ( 99,000 करोड़ रुपए) में फ्लिपकार्ट की 60-80% हिस्सेदारी खरीद सकती है। इस डील के लिए फ्लिपकार्ट की वैल्युएशन 20 बिलियन डॉलर आंकी गई है। डील से दोनों कंपनियों को फायदा होगा। फिलहाल जापान के सॉफ्टबैंक ग्रुप और टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट की फ्लिपकार्ट में 20-20% हिस्सेदारी है। इन दोनों कंपनियों से अपना शेयर बेचने के लिए कहा गया है। पिछले साल फ्लिपकार्ट की वैल्यू 12 बिलियन डॉलर आंकी गई थी।

– वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट को फायदा होगा जबकि अमेजॉन को झटका लगेगा
– वॉलमार्ट दुनिया की सबसे बड़ी रीटेल कंपनी है
-अमेजॉन दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है
-फ्लिपकार्ट भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है
-ग्लोबल मार्केट में वॉलमार्ट के लिए अमेजॉन से बड़ा चैलेंज बन रही है
– भारत में भी अमेजॉन ही फ्लिपकार्ट की सबसे बड़ी कंपीटीटर है

– इस डील के जरिए वॉलमार्ट को भारत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मिल जाएगा जिससे वो अपनी कंपीटीटर अमेजॉन से मुकाबला कर पाएगी। दुनि‍या की सबसे बड़ी री‍टेल कंपनी होने के बावजूद वॉलमार्ट को अमेजन से कड़ी टक्कर मिल रही है क्योंकि वॉलमार्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पिछड़ रही है और बड़ी संख्या में कंज्‍यूमर अमेजॉन पर शिफ्ट हो रहे हैं। चीन के बाजार में भी दोनों कंपनियां इस संघर्ष का नुकसान उठा चुकी हैं।डील होने पर फ्लिपकार्ट को एक बड़ी रकम मिलेगी, साथ ही रीटेल कारोबार का वॉलमार्ट का लंबा अनुभव भी काम आएगा। नई टेक्नोलॉजी का सपोर्ट भी मिलेगा जिससे फ्लिपकार्ट, अमेजॉन को चुनौती दे सकेगी। सूत्रों के मुताबिक अमेजॉन ने भी 60% शेयर खरीदने का ऑफर दिया था लेकिन फ्लिपकार्ट ने वॉलमार्ट को तवज्जो दी। बताया जा रहा है कि अमेजॉन ने डील के लिए फ्लिपकार्ट की वैल्यू 22 बिलियन डॉलर (1.45 लाख करोड़ रुपए) आंकी थी। फ्लिपकार्ट का भारत के 40% ऑनलाइन रीटेल मार्केट पर कब्जा है। रिसर्च कंपनी फॉरेस्टर के मुताबिक अमेजन फिलहाल फ्लिपकार्ट से पीछे है। भारत में ई-कॉमर्स का बाजार फिलहाल 30 बिलियन डॉलर (1.98 लाख करोड़ रुपए) का है जिसमें फ्लिपकार्ट और अमेजॉन बड़े खिलाड़ी हैं। भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट काफी तेजी से बढ़ रहा है। मॉर्गन स्टेनले के मुताबिक 2026 तक ये 200 बिलियन डॉलर (13.20 लाख करोड़) का बाजार हो जाएगा। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी कंपनियों को भारत में काफी संभावनाएं दिख रही हैं। भारतीय बाजार में अमेजॉन और फ्लिपकार्ट के बीच तगड़ा कंपीटीशन है। मार्केटिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दोनों ने बड़ी रकम खर्च की है।अमेजॉन भारत में अपने कारोबार विस्तार के लिए 5 बिलियन डॉलर का निवेश का निवेश करेगी। हाल ही में अमेजॉन के सीएफओ ने निवेशकों से कहा था कि कंपनी भारत में निवेश जारी रखेगी क्योंकि यहां ग्रोथ की काफी संभावना है। हालांकि 2018 की पहली तिमाही में अमेजॉन को इंटरनेशनल ऑपरेशंस में 622 मिलियन डॉलर (4.10 लाख करोड़ रुपए) का घाटा झेलना पड़ा है।वॉलमार्ट और अमेजॉन ने भारत में एक दूसरे को पछाड़ने के लिए भी फ्लिपकार्ट पर दांव लगाया क्योंकि दोनों को चीन में अपने कंपीटीशन का नुकसान उठाना पड़ा था और दोनों ही दिग्गज वहां अलीबाबा से पिछड़ गए।सॉफ्टबैंक और टाइगर ग्लोबल के बाद दक्षिण अफ्रीका की नैस्पर सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है। फ्लिपकार्ट में टेनसेंट होल्डिंग्स लिमिटेड और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प की हिस्सेदारी भी है। वॉलमार्ट डील के बाद ये दोनों कंपनियां थोड़े बहुत शेयर अपने पास रख सकती हैं। सॉफ्टबैंक ने फ्लिपकार्ट में 2.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया था। इससे पहले सॉफ्टबैंक ने स्नेपडील और फ्लिपकार्ट के मर्जर पर जोर दिया था लेकिन स्नेपडील ने सौदा करने से इनकार कर दिया।जानकारी के मुताबिक फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर सचिन बंसल अपने हिस्से से 5% से भी ज्यादा शेयर बेचकर पूरी तरह बाहर हो जाएंगे। बताया जा रहा है कि सचिन बंसल वॉलमार्ट डील के बाद की स्ट्रेटेजी और प्रस्तावित स्ट्रक्चर से सहमत नहीं हैं इसलिए पूरी तरह कंपनी छोड़ने का मन बना लिया। वॉलमार्ट के डील के बाद बिन्नी बंसल नए चेयरमैन और ग्रुप सीईओ हो सकते हैं। फिलहाल फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति हैं और वह इसी भूमिका में बने रहेंगे। वॉलमार्ट 10 मेंबर वाले बोर्ड में तीन डायरेक्टर और सीएफओ नियुक्त कर सकती है। सचिन ने बिन्नी बंसल के साथ मिलकर 11 साल पहले 2007 में फ्लिपकार्ट को खड़ा किया था। इससे पहले दोनों अमेजॉन के एंप्लॉयी थे।भारतीय ट्रेडर्स का कहना है कि वॉलमार्ट रीटेल एफडीआई से देश में एंट्री नहीं कर पाई तो वह ई-कॉमर्स के जरिए रास्ता तलाश रही है। कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT)ने इस मामले में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु से दखल की मांग की है। सीएआईटी का कहना है कि इस तरह की डील से पहले 75% ऑनलाइन विक्रताओं की मंजूरी जरूरी होनी चाहिए। देश में ई-कॉमर्स बिजनेस के लिए जल्द पॉलिसी तैयार की जानी चाहिए। सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि ऐसी कंपनियां दुनिया में कहीं से भी सामान लाएंगी और देश को डंपिंग ग्राउंड बना देंगी। भारतीय रीटेलर्स कंपीटीशन में पिछड़ जाएंगे और उनका धंधा चौपट हो जाएगा। देश में फिलहार करीब 7 करोड़ रीटेलर्स हैं, जिनमें से लगभग 3 करोड़ रीटेलर्स को इस डील से सीधे तौर पर नुकसान होगा।

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