वो मौलाना जिसे भगवान कृष्ण से था अटूट प्रेम

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : मौलाना हसरत मोहानी एक स्वतंत्रता सेनानी, एक पत्रकार, एक शायर, संविधान सभा का एक सदस्य, और ‘इंक़लाब ज़िन्दाबाद’ का नारा इज़ाद करनेवाले एक इंक़लाबी शख्स के तौर पर तो जाने जाते हैं मगर उनका एक रूप जिसके बारे में लोगों कम ही पता होता है, वो रूप है कृष्ण भक्ति का.
“इंक़लाब ज़िंदाबाद” वो नारा जो भगत सिंह समेत तमाम आज़ादी के मतवालों के मुंह से जंग-ए-आजादी की पहचान बना. इस नारे को इज़ाद करने वाले हसरत मोहानी ख़ुद भी एक आज़ादी के सिपाही थे. सिर्फ़ 20 साल की उम्र में अंग्रेजों के ख़िलाफ़ अपने अख़बार “उर्दू-ए-मोअल्ला” में एक क्रांतिकारी लेख छापा. जिसके एवज़ में उन्हें ब्रितानी हुकूमत ने एक साल के लिए जेल में डाल दिया. ये घटना 1903 की है. उस
वक्त वो अलीगढ़ में रहते थे. इसी दौरान वो शाराए मुतक़द्दिमीन के दीवानों का इंतिख़ाब करना शुरू किया. साथ ही स्वदेशी तहरीकों में भी हिस्सा लेते रहे.
मौलाना मोहानी पूरी जिंदगी कृष्ण प्रेम से सराबोर थी. उनका बचपन ज्यादातर मथुरा में बीता था. बचपन में वो अक्सर मथुरा के पुराने और ऐतिहासिक मंदिरों में बैठकर कृष्ण लीला के प्रवचन सुनते थे. कृष्ण की लीलाओं को सुनने और समझने की ऐसा खुमारी चढ़ी कि फिर ताउम्र उन्हीं के होकर रह गए.

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