(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : मां दुर्गा की छठी शक्ति कात्यायनी हैं। महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में अवतरित होने के कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। ग्रंथों के अनुसार, ऋषि कात्यायन ने मां दुर्गा को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए उनकी कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ही मां उनकी पुत्री के रूप में अवतरित हुईं। मां का स्वरूप अत्यंत दिव्य व स्वर्ण के समान दैदीप्यमान है। इनका वाहन सिंह है। मां कात्यायनी ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं।मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें आत्मविश्वास से संपुष्ट करता है। यह हमारे जीवन को उच्चता की ओर ले जाने की शक्ति प्रदान करता है। हमें सभी दोषों व दुर्गुणों से मुक्ति प्रदान कर जीवन को स्वर्णिम आभा से आलोकित करता है। यह हममें निहित कुसंस्कारों व निकृष्ट विचारों को खत्म कर हमें पवित्र विचारों से युक्त करता है। हममें आत्मोत्थान व आत्मकल्याण की जिज्ञासा जाग्रत होती है और हमारी चेतना ऊध्र्वगामी बनती है। इस प्रकार हमारे भीतर श्रेष्ठता का उद्भव होता है।