श्रीलंका में राजनीतिक संकट: पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे नए प्रधानमंत्री नियुक्त।

अमेरिका ने श्रीलंका की सभी राजनीतिक पार्टियों से संविधान का पालन करने और हिंसा से दूर रहने की अपील की है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : श्रीलंका में आए राजनीति तूफान पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिका ने श्रीलंका को संविधान के मुताबिक काम करने की सलाह दी है। शुक्रवार को श्रीलंका में नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने मौजूदा प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया। वहीं उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। अमेरिका ने श्रीलंका की सभी राजनीतिक पार्टियों से संविधान का पालन करने और हिंसा से दूर रहने की अपील की है। अमेरिका ने कहा, ”हम उम्मीद करते हैं कि श्रीलंका सरकार ह्यूमन राइट्स, सुधार, जवाबदेही, न्याय और सुलह के लिए अपनी जेनेवा प्रतिबद्धताओं को कायम रखेगा” राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाने के सिरिसेना के कदम से संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है क्योंकि संविधान में 19वां संशोधन बहुमत के बिना विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाने की अनुमति नहीं देगा। इससे पहले 72 साल के राजपक्षे ने शपथ लेने के बाद सिरिसेना के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की। सिरिसेना के राजनीतिक मोर्चे यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम अलायंस (यूपीएफए) ने घोषणा की कि उसने मौजूदा गठबंधन सरकार से समर्थन लेने का फैसला किया है। ये गठबंधन यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के साथ था जिसके नेता रानिल विक्रमसिंघे अब तक प्रधानमंत्री थे। घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री मंगला समरवीरा ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में राजपक्षे की नियुक्ति असंवैधानिक और गैरकानूनी है। 2015 में विक्रमसिंघे के समर्थन से सिरिसेना राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले करीब एक दशक तक राजपक्षे की सरकार थी। उनकी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे सिरिसेना ने उनसे अलग होकर राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था। राजपक्षे और सिरिसेना की कुल 95 सीटें हैं और वो बहुमत से पीछे हैं। विक्रमसिंघे की यूएनपी के पास अपनी खुद की 106 सीटें हैं और बहुमत से केवल सात कम हैं।

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