सहारा ग्रुप के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट एंबी वैली की दोबारा नीलामी का सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र के डीजीपी को सहारा ग्रुप के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट एंबी वैली को दोबारा नीलामी के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के ऑफिशियल लिक्विडेटर को सौंपने को कहा। इससे पहले मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कोर्ट को बताया था कि सहारा ग्रुप की ओर से रुकावट पैदा करने के कारण एंबी वैली की नीलामी नहीं हो सकी।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच को सेबी की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अरविंद पी दातार ने बताया कि एंबी वैली के बोर्ड की ओर से लॉक आउट घोषित करने और प्रॉपर्टी को पुलिस को सौंपने के बाद कोई बिडर सामने नहीं आया। सहारा के वकील कपिल सिब्बल ने पिछली सुनवाई में बताया गया था कि इस प्रॉपर्टी के लिए केवल दो संभावित बिडर हैं। सिब्बल ने एंबी वैली की नीलामी करने के कोर्ट के ऑर्डर का शुरुआत में विरोध भी किया था।
हालांकि, कोर्ट ने बकाया रकम चुकाने के लिए सहारा की ओर से और समय मांगने के निवेदन को खारिज करते हुए सेबी से नीलामी पर आगे बढ़ने के लिए कहा था। दातार ने गुरुवार को कोर्ट को बताया कि सहारा ने पुलिस को एंबी वैली का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए पत्र लिखा था और इस वजह से नीलामी असफल रही। दातार ने सहारा और उसके डायरेक्टर्स के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने की भी मांग की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी सहारा या उसके डायरेक्टर्स के खिलाफ अवमानना की कोई कार्यवाही नहीं की है, लेकिन कोर्ट ने महाराष्ट्र के डीजीपी को एंबी वैली हाई कोर्ट के लिक्विडेटर सौंपने के लिए कहा, जो इसे बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। वह कंपनी लॉ बोर्ड के जज और हाई कोर्ट के एक जज के तहत काम करेंगे। इसके बाद सेबी एंबी वैली की दोबारा नीलामी करने की कोशिश करेगा।
सहारा को अपनी दो इनवेस्टमेंट स्कीमों में इनवेस्टर्स की रकम लौटाने के लिए सेबी को लगभग 37,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इन दोनों स्कीमों को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल (SAT) ने गैर कानूनी करार दिया था। SAT के इस फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया था। सहारा ने अभी तक इस रकम का कुछ हिस्सा ही चुकाया है। सहारा के प्रमुख सुब्रत रॉय कंपनी के रकम चुकाने में नाकाम रहने के कारण पहले ही जेल में दो वर्ष बिता चुके हैं। रॉय को उनकी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट ने रॉय की रिहाई को नियमित किस्तों में बकाया रकम चुकाने से जोड़ दिया है। सहारा ग्रुप बकाया रकम की अंतिम दो किस्तें चुकाने में असफल रहा है और उसने भुगतान के लिए समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। सहारा ने बाकी की रकम दो वर्ष की अवधि में किस्तों में चुकाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने यह अनुमति देने से मना कर दिया था और उसे तुरंत रकम चुकाने को कहा था।

Comments (0)
Add Comment