हाई कोर्ट ने मांगा सेना-सरकार से जवाब, सेना में जाति-आधारित क्यों होती है नियुक्ति ?

बता दें कि भारतीय सेना के तीन जातियों (जाट, जाट सिख, राजपूत) से आनेवाले जवान ही सिर्फ आर्मी की सबसे पुरानी रेजिमेंट में, भारतीय राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड (पीबीजी) के तौर पर भर्ती हो सकते हैं

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ ) : भारतीय सेना में जाति को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सेना और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। थल सेना में ही सिर्फ जाति आधारित भर्तियां होती हैं, वायु और नौ सेना में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। बता दें कि भारतीय सेना के तीन जातियों (जाट, जाट सिख, राजपूत) से आनेवाले जवान ही सिर्फ आर्मी की सबसे पुरानी रेजिमेंट में, भारतीय राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड (पीबीजी) के तौर पर भर्ती हो सकते हैं।इस एक रेजिमेंट को छोड़कर किसी अन्य रेजिमेंट में शामिल होने के लिए जाति कोई आधार नहीं है। क्षेत्र और धर्म के आधार पर भी भर्ती में भेदभाव का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, समूह में कुछ रेजिमेंट में जवानों की भर्ती होती है जैसे मराठा रेजिमेंट, राजस्थान राइफल्स, डोगरा रेजिमेंट और जाट रेजिमेंट।
देश की कई अदालतों में समय-समय पर ऐसी याचिकाएं दाखिल की जाती रही हैं जिनमें सेना में जाति आधारित भर्तियों को रद्द करने की मांग की जाती है। इसे अंसवैधानिक करार देते हुए इस प्रावधान को खत्म करने की मांग समय-समय पर की जाती रही है।

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