(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) शिमला: कोटखाई के बहुचर्चित गुड़िया प्रकरण से जुड़े सूरज लॉकअप केस में जुडिशियल कस्टडी में चल रहे पूर्व आईजी जहूर हैदर ज़ैदी समेत 9 पुलिस कर्मियों की जुडिशियल कस्टडी फिर बढ़ गई है। आज इन सभी को सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया। वहां से इन सभी को 9 मार्च तक जुडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस कर्मियों के वायस सैंपल का मामला लटका हुआ ही है क्योंकि आज कोर्ट ने इसे लेकर कोई आदेश नहीं दिया। वायस सैंपल के लिए कोर्ट में सीबीआई की टीम ने आवेदन कर रखा था। सीबीआई की दलील थी कि वायस सैंपल इसलिए जरूरी है क्योंकि उन्हें इन पुलिस कर्मियों के मोबाइल में आडियो क्लिप मिली है। इन क्लिप में इनकी ही आवाज है, उसके लिए वायस सैंपल लेना जरूरी है। इससे वह यह पुष्ट कर पाएंगे कि मोबाइल में रिकार्ड आडियो क्लिप में आवाज क्या वाकई इनमें से ही किसी की है या फिर किसी और की। सीबीआई ने कहा था कि जो आडियो क्लिप मिली है, वह इस केस में काफी अहम है। आरोपियों ने कहा कि वायस सैंपल हिमाचल में ही लिए जाएं क्योंकि यहां पर इसकी सुविधा उपलब्ध है, लेकिन आज इस पर कोर्ट ने कोई आदेश नहीं दिया। याद रहे कि शिमला जिले के कोटखाई के दांदी जंगल में गुड़िया का शव बीते वर्ष 6 जुलाई को बरामद हुआ था। गुड़िया 4 जुलाई से लापता थी, इस मामले की जांच को पुलिस ने एसआइटी का गठन किया था इसने इस मामले में जिन 6 आरोपियों को पकड़ा था उनमें से एक सूरज की 18 जुलाई 2017 की रात्रि को कोटखाई थाने के लॉकअप में हत्या हो गई थी। इसकी हत्या का आरोप दूसरे आरोपी पर राजू पर लगा था। लेकिन बाद में सरकार द्वारा मामला सीबीआई को सौंपने के बाद हुई जांच में सूरज हत्या मामले में एसआईटी ही लपेटे में आई गई। सीबीआई ने एसआईटी चीफ जहूर हैदर जैदी समेत आठ पुलिस कर्मियों को 29 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया था। जबकि तत्कालीन एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी को 16 नवंबर को गिरफ्तार किया था। अब आज इस मामले की सुनवाई के बाद सभी आरोपी 9 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए हैं।