हिमाचल प्रदेश-मंडी : शिवरात्रि में सिफारिशी कलाकारों को मिल रहा है मंच, प्रोफेशनल सिंगरों के साथ हो रहा भेदभाव

प्रशासन द्वारा ली गई स्वर परीक्षा मात्र दिखावा बनकर रह गई है।

(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में आयोजित अंर्तराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में मंडी के स्थानीय कलाकारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। अंर्तराष्ट्रीय शिवरात्री समारोह में स्थानीय कलाकारों को मंच दिलाने के लिए आयोजक समिति ने लोक संर्पक विभाग द्वारा लगभग  मंडी के स्थानीय 900 कलाकारों का आडिशन लिया था, जिसमें मात्र 50-60 कलाकारों का चयन किया गया था। ऑडिशन लेने के बाजजूद मंच पर कई सिपारिशी कलाकारों को मंच प्रदान किया गया वह तो न सिंगर है और न ही कोई प्रोफेशनल कलाकार है । प्रशासन द्वारा सिफारिशी कलाकारों को मंच प्रदान करवाने के लिए मंडी के कुछ कलाकारों ने इसका कड़ा विरोध किया है। कलाकार देविंद्र भरद्वाज,गीतानंद चौहान,तिजेंद्र ठाकुर,बचन सिंह,,एस कश्यप ,लीला मणी,नरेन्द्र मेहता ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में होने वाली सांस्कृतिक संध्या में प्रस्तुति देने के लिए जिला मंडी के कलाकारों की स्वर परीक्षा ली गई थी, लेकिन मंच उन कलाकारों को मिल रहा है जो स्वर परीक्षा में हाजिर ही नहीं थे । उक्त कलाकारों का कहना है कि क्या स्वर परीक्षा सिर्फ दिखावा है।  प्रशासन के नियमानुसार  स्वर परीक्षा जिला मंडी के कलाकारों के लिए अनिवार्य है। तो फिर क्यों उन कलाकारों को मंच मिला जो स्वर परीक्षा में आए ही नहीं थे । किस आधार पर उन कलाकारों को मंच दिया गया। हमें बताया जाए कि जिन कलाकारों को मंच दिया गया उन कलाकारों का हिमाचली संस्कृति के प्रति क्या योगदान है। उक्त कलाकारों का कहना कि इन कलाकारों ने ऐसी कौन सी उपलब्धियां हासिल की जिनके कारण उन कलाकारों को अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान किया गया। क्या वह कलाकार मुफ्त में प्रस्तुति देते हैं यहां दिन.रात हिमाचली संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं । उनका कहना कि है कि स्वर परीक्षा के लिए काफी मात्रा में कलाकार आए थे और वही कलाकार आए थे जो संगीत के बारे में कुछ जानते हैं। उक्त कलाकारों का कहना कि हमने भी स्वर परीक्षा दी थी और आज के दौर में उनकी दर्जनों कैसटें बाजार में हैं और यूट्यूब पर भी उनके गाने बजते हैं, इसके बावजूद भी उन्हें गाने का मौका नहीं मिला। इन कलाकारों का कहना है कि यदि इसी तरह से कलाकारों को सिफारिश के आधार पर मंच देना था तो स्थानीय कलाकारों का ऑडशिन क्यों लिया गया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिला मंडी के वो कलाकार देखे गए जिनका ऑडिशन नहीं हुआ है। कलाकारों ने कहा कि आखिर उन कलाकारों को क्यों मंच दिया गया। यदि उन्हें मनंच देने के कारण उनका  सीनियर कलाकार होना है तो वो अपनी सीनियरिटी का सबूत दें। साथ ही कलाकारों ने पूछा है की प्रस्तुति देने वाले कलाकार चयन मानक बताएं ताकि वो भी अगले साल उन्हीं मानकों को अपनाकर गायन के लिए चयनित हो सकें। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि यदि प्रशासन इसी तरह सिफारिशी कलाकारों को मंच देता रहा तो जो पेशे से कलाकार है उनका क्या होगा। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की छानबीन की जाए ताकि भविष्य में इस तरह से धांधली न हो।

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