2जी स्पेक्ट्रम मामले पर ए राजा ने पूछा: मनमोहन सिंह चुप क्यों थे

(न्यूज़ लाइव नाऊ) :  2 जी स्पेक्ट्रम मामले से बरी होने के बाद ए राजा ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। राजा का कहना है कि 2 जी स्पेक्ट्रम पॉलिसी में बदलाव प्रधानमंत्री की सहमति के बाद ही किया गया था। यह राष्ट्रहित में था, लेकिन खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

अपनी किताब ‘2जी सागा अनफोल्ड्स’ में उन्होंने नियंत्रक व महालेखा परीक्षक विनोद राय पर भी साधा निशाना है। किताब ट्रायल के दौरान लिखी गई थी, लेकिन इसे प्रकाशित बरी होने के एक माह बाद किया गया। राजा का कहना है कि तत्कालीन पीएम को उनके सलाहकारों व टेलीकाम क्षेत्र के कुछ दिग्गजों ने भ्रमित किया था।



22 अक्टूबर 2009 को जब सीबीआइ ने उनके दफ्तर में रेड की तो, वह पीएमओ में जाकर डॉ. मनमोहन सिंह से मिले। उन्हें तब हैरत हुई जब पीएम ने रेड को लेकर अनिभिज्ञता जताई। उनका कहना है कि टेलीकाम क्षेत्र के दिग्गज नए खिलाडि़यों को स्पेक्ट्रम देने के खिलाफ थे। जब पॉलिसी अपने अंतिम चरण में थी तब पीएमओ ने उन्हें एक पत्र भेजा। इसमें वहीं बातें लिखी थीं जो पुराने खिलाड़ी कह रहे थे। उनका यह भी कहना है कि इस तरह का पत्र नहीं भेजा जाना चाहिए थे। पीएम को इस तरह की कार्यवाही में सीधे नहीं आना चाहिए था। राजा का यह भी सवाल उठाया कि क्या मनमोहन के दस्तखत वाला पत्र वाकई में पीएमओ में तैयार किया गया था? लगता है कि उन्हें बताया गया था कि टेलीकाम मंत्रालय में सब कुछ ठीक नहीं है।

राजा का कहना है कि यूपीए-2 सरकार को खत्म करने के लिए साजिश रची गई थी। बंदूक विनोद राय के कंधे पर रखी गई। उन्होंने अपने निजी एजेंडे के तहत सनसनी फैला दी कि टेलीकाम पॉलिसी बदलने से 1.76 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। राय ने अपनी किताब ‘नॉट जस्ट एन अकाउंटेंट’ में खुद को राष्ट्र भक्त करार दिया। इसमें कुछ पन्ने 2जी मामले को समर्पित किए गए हैं। राजा का कहना है कि सारे प्रकरण में कैग सूत्रधार था। उसने सनसनी पैदा की, जिसे मीडिया और विपक्षी दलों ने आगे बढ़ाया। उनकी भूमिका के पीछे साजिश से इन्कार नहीं किया जा सकता। खुद को सुर्खियों में लाने के लिए भी उन्होंने यह कृत्य किया।




ट्रायल के दौरान लिखी किताब में राजा ने कहा कि राय को उनके मामले में गवाह के तौर पर समन किया जाना चाहिए, जिससे उनके वकील सवाल जवाब कर सकें। राय को उन्होंने ऐसी बिल्ली की तरह से करार दिया, जो अपनी आंखें बंद कर लेती है और कहती है कि पूरी दुनिया अंधकारमय है। राजा ने यह भी कहा कि राय की भूमिका की जांच होनी बेहद जरूरी है। ट्राई के स्पष्टीकरण के बाद भी वह अपनी रिपोर्ट को सही करार देते रहे। किताब में लिखा है कि विनोद राय ने 2 जी स्पेक्ट्रम नीलामी के खातों का ऑडिट करते समय संवैधानिक दायित्वों से आगे जाकर काम किया।

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