विजयादशमी पर मोहन भागवत के भाषण की 5 प्रमुख बातें

(न्यूज़लाइवनाउ-India) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव पर संबोधन दिया। अपने उद्बोधन में उन्होंने देश और विश्व के सामने मौजूद चुनौतियों पर गहन विचार रखते हुए कई अहम संदेश दिए।

  1. हिंसक आंदोलनों पर चेतावनी

भागवत ने पड़ोसी मुल्कों में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे उपद्रव से कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता। इससे सिर्फ अस्थायी अशांति पैदा होती है। वास्तविक बदलाव केवल लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण उपायों से संभव है। उन्होंने महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि बापू ने संप्रदायवाद के खिलाफ समाज को बचाया और स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान अमूल्य रहा।

  1. पड़ोसी देशों की उथल-पुथल

उन्होंने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में अस्थिरता देखी जा रही है। जब शासन जनता की अपेक्षाओं को अनसुना कर देता है तो असंतोष बढ़ता है, लेकिन हिंसक विद्रोह किसी के हित में नहीं होता। डॉ. अंबेडकर ने भी इसे अराजकता कहा था। भागवत ने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि फ्रांस की क्रांति के बाद भी तानाशाही आई और साम्यवादी क्रांति वाले देश भी आज पूंजीवाद की ओर झुक गए हैं। अराजकता से बाहरी ताकतों को हस्तक्षेप का अवसर मिल जाता है।

  1. परिवार और समाज की भूमिका

भागवत ने कहा कि विज्ञान और तकनीक की रफ्तार इतनी तेज है कि इंसान अक्सर उसके साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाता। प्रकृति की आपदाएं और युद्ध तो चुनौती हैं ही, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक ढांचे में भी दरारें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का निर्माण ही समाज को गढ़ता है और समाज से ही राष्ट्र तथा विश्व की नींव मजबूत होती है। दुनिया में परिवार और समाज की परंपरा टूट चुकी है, लेकिन भारत में अभी जीवित है—इसे संजोकर रखना होगा।

  1. आतंकवाद और सुरक्षा

उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें सीमा पार से आए आतंकियों ने 26 भारतीयों की उनके धर्म पूछकर हत्या की। इस घटना ने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया। भागवत ने कहा कि सेना और सरकार ने सटीक जवाब देकर साहस का परिचय दिया। इस हमले से यह भी साफ हुआ कि सुरक्षा को और मजबूत करना जरूरी है और यह समझना होगा कि असली मित्र कौन हैं। नक्सलवाद पर हुई कड़ी कार्रवाई और समाज में उनकी विचारधारा के प्रति घटते आकर्षण का भी उन्होंने उल्लेख किया।

  1. स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर

अमेरिका की टैरिफ नीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह नीति भले उनके हित में रही हो, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया ने झेला। कोई भी देश अकेले नहीं रह सकता, लेकिन परनिर्भरता मजबूरी नहीं बननी चाहिए। उन्होंने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा और साथ ही वैश्विक संबंध भी मजबूत रखने होंगे, परंतु वे हमारी कमजोरी का कारण न बनें।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित और जिम्मेदार बनना होगा। मजबूत हिंदू समाज ही सुरक्षा की गारंटी है। भारत प्राचीन काल से हिंदू राष्ट्र रहा है और हिंदू संस्कृति ने विश्व को अद्वितीय योगदान दिया है।

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