यूपी में लोकसभा सीटों को लेकर नया प्रस्ताव, बदल सकता है पूरा राजनीतिक समीकरण

(न्यूज़लाइवनाउ-UP) देश में प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण कानून के बीच उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटों को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। केंद्र सरकार की योजना के अनुसार संसद में सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जिसका सबसे ज्यादा असर बड़े राज्यों पर देखने को मिलेगा।

महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू

वर्तमान में लोकसभा की कुल 543 सीटें हैं, लेकिन इन्हें बढ़ाकर करीब 850 तक किया जा सकता है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना है। 

अगर यह योजना लागू होती है तो उत्तर प्रदेश, जो पहले से ही सबसे ज्यादा सांसद भेजता है, उसे सबसे बड़ा फायदा मिल सकता है। अभी यूपी में 80 सीटें हैं, जो बढ़कर लगभग 140 तक पहुंच सकती हैं। 

परिसीमन का मतलब होता है जनसंख्या के आधार पर चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करना। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि हर क्षेत्र में मतदाताओं का संतुलन बना रहे और प्रतिनिधित्व सही तरीके से हो।

सरकार का मानना है कि जनसंख्या में बदलाव के कारण सीटों का पुनर्गठन जरूरी है, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक संतुलित और प्रभावी बन सके।

महिला आरक्षण से जुड़ा पूरा मामला

महिला आरक्षण कानून पहले ही पास हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने के लिए नई सीटों और सीमाओं का निर्धारण जरूरी है। इसलिए परिसीमन और सीटों में बढ़ोतरी को इससे जोड़ा जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व दिया जा सके।

 इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। खासकर दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि अगर सीटों का बंटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो उनकी हिस्सेदारी कम हो सकती है।

विपक्ष का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया जा रहा है और इससे कुछ राज्यों या वर्गों का प्रतिनिधित्व कमजोर पड़ सकता है।

 हालांकि सरकार का कहना है कि सभी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी और किसी का नुकसान नहीं होगा, बल्कि कुल संख्या बढ़ाकर संतुलन बनाया जाएगा। 

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