(न्यूज़लाइवनाउ-Punjab) पंजाब में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने गंभीर चिंता जताई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरदासपुर और मानसा में हुई दो अलग-अलग हत्याओं के मामलों में पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही, राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने और नशे के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का भी ब्योरा मांगा गया है।
गुरदासपुर में हमले के दौरान एक व्यक्ति की मौत, दो गंभीर रूप से घायल
गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव में हुई हिंसक वारदात ने इलाके की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले में बिक्रमजीत सिंह की जान चली गई, जबकि निशान सिंह और गुरमुख सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से घटना की परिस्थितियों और मामले में की जा रही कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में हमले के पीछे की वजह, आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी को लेकर स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच के निष्कर्षों के बारे में अभी कोई निश्चित बात कहना उचित नहीं होगा।
मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या
दूसरा मामला मानसा का है, जहां 13 अक्टूबर 2026 को परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या कर दी गई थी। उन्हें पंजाब में नशीले पदार्थों की बिक्री और उनके दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति के तौर पर जाना जाता था।
इस घटना को लेकर भी गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि हत्या के मामले में क्या कार्रवाई की गई है और पंजाब में नशे के कारोबार को रोकने के लिए सरकार की ओर से कौन-कौन से प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूत करने पर जोर
केंद्र ने पंजाब सरकार से नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान की रणनीति और कार्ययोजना की जानकारी भी मांगी है। इसमें विशेष एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन और पुनर्गठन से जुड़े प्रयास शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय ने नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों में वित्तीय जांच को अनिवार्य रूप से आगे बढ़ाने, जांच एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर बनाने और आरोपियों के खिलाफ अभियोजन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी करने पर जोर दिया है।
मंत्रालय ने मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों को नामित करने और संबंधित कामकाज की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति जैसे उपायों पर भी जानकारी मांगी है।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत
गृह मंत्रालय की प्राथमिकताओं में नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े सीमापार और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है। केंद्र चाहता है कि नशे की आपूर्ति से जुड़े संगठित तंत्र पर प्रभावी प्रहार किया जाए और जांच, अभियोजन तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत बनाया जाए।
इन कदमों का उद्देश्य केवल अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे की तस्करी और उसके सेवन से जुड़ी समस्या पर व्यापक स्तर पर नियंत्रण स्थापित करना भी है। इसी संदर्भ में पंजाब सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ‘नशामुक्त भारत’ अभियान के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का विवरण मांगा गया है।
पंजाब सरकार से जवाब का इंतजार
गुरदासपुर और मानसा की घटनाओं ने राज्य में नागरिकों की सुरक्षा तथा नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण को लेकर बहस तेज कर दी है। गृह मंत्रालय की ओर से मांगी गई रिपोर्ट के जरिए दोनों मामलों की स्थिति और नशा विरोधी अभियान की प्रगति का आकलन किया जाएगा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख और पंजाब सरकार की ओर से दिए गए औपचारिक जवाब का उल्लेख नहीं है। इसलिए आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।