(न्यूज़लाइवनाउ-India) राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शनिवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की झड़ी लगा दी। ग्लास्गो में महज करीब आधे घंटे के भीतर भारत की झोली में मुक्केबाजी के दो स्वर्ण पदक आ गए। प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया ने अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में दमदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। पुरुष वर्ग में जादूमणि सिंह को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
प्रीति पवार ने रिंग में दिखाया दबदबा
महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में प्रीति पवार का सामना कनाडा की स्कार्लेट सवाना डेलगाडो से हुआ। भारतीय मुक्केबाज ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी और तीनों राउंड में पांचों जजों का समर्थन हासिल करते हुए 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से जीत दर्ज की।
प्रीति ने पहले दो राउंड में बढ़त बनाकर मुकाबले की दिशा लगभग तय कर दी थी। उनके सटीक पंच और बेहतर रिंग रणनीति के सामने प्रतिद्वंद्वी ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सकीं। तीसरे राउंड में भी प्रीति ने अपना नियंत्रण कायम रखा और भारत को मुक्केबाजी का पहला स्वर्ण दिलाया।
प्रीति का पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा। उन्होंने राउंड ऑफ-16 में मलावी की डेबोरा म्टेंजे को आरएससी के जरिए हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में भी उन्होंने क्रमशः नॉर्दन आयरलैंड और जाम्बिया की मुक्केबाजों को 5-0 से मात दी।
जैस्मिन लंबोरिया ने भी जीता गोल्ड
प्रीति की जीत के कुछ ही मिनट बाद जैस्मिन लंबोरिया रिंग में उतरीं। 57 किलोग्राम महिला वर्ग के फाइनल में उनके सामने नॉर्दन आयरलैंड की अनुभवी मुक्केबाज मिकेला वॉल्श थीं।
जैस्मिन ने शुरुआती राउंड में कड़ी टक्कर के बावजूद बढ़त बनाई। दूसरे राउंड में उन्होंने मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया और सभी पांच जजों ने उनके पक्ष में पूरे अंक दिए। तीसरे राउंड में भी जैस्मिन ने बेहतर आक्रामक खेल दिखाते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।
अंतिम फैसला 5-0 से जैस्मिन के पक्ष में रहा। इस जीत के साथ उन्होंने भारत के खाते में एक और स्वर्ण जोड़ दिया।
जादूमणि सिंह ने जीता रजत
पुरुष मुक्केबाजी में जादूमणि सिंह ने भी भारत को पदक दिलाया। 55 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उनका सामना ऑस्ट्रेलिया के झाई डिक्सन से हुआ।
जादूमणि ने मुकाबले की शुरुआत अच्छी की और पहला राउंड अपने नाम किया। हालांकि अगले दो राउंड में ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज ने वापसी करते हुए बढ़त हासिल कर ली। अंततः जादूमणि को सर्वसम्मत निर्णय में 0-5 से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक मिला।
मुक्केबाजी में इन उपलब्धियों ने भारत की कुल पदक संख्या को भी मजबूत किया है। रिपोर्ट के अपडेट के अनुसार, इस चरण तक भारत ने 30 पदक हासिल कर लिए थे, जिनमें 8 स्वर्ण, 15 रजत और 7 कांस्य शामिल थे। भारत पदक तालिका में छठे स्थान पर था।
भारत के लिए मुक्केबाजी का अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कई अन्य भारतीय मुक्केबाजों के फाइनल मुकाबले भी निर्धारित थे, जिनसे पदक संख्या और बढ़ने की उम्मीद बनी हुई थी।
भारतीय मुक्केबाजी के लिए यादगार दिन
ग्लास्गो में प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया की लगातार स्वर्णिम जीत ने भारतीय दल का उत्साह बढ़ा दिया है। दोनों खिलाड़ियों ने न केवल अपने-अपने भार वर्ग में खिताब हासिल किया, बल्कि कठिन मुकाबलों में दबाव संभालने और निर्णायक क्षणों में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता भी दिखाई।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन देश के पदक अभियान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। अब भारतीय प्रशंसकों की नजरें बाकी फाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां देश को और पदकों की उम्मीद है।
और खबरों के लिए हमें फॉलो करें Facebook पर।