(न्यूज़लाइवनाउ-India) संसद के बजट सत्र के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष के मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियां भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और सरकार वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
जयशंकर ने बताया कि खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया के अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए वहां की स्थिति भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। सरकार लगातार हालात की समीक्षा कर रही है और जरूरत पड़ने पर भारतीयों की मदद के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय कर स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कई भारतीयों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। ईरान में मौजूद कुछ भारतीय छात्रों को वहां से निकालकर दूसरे सुरक्षित क्षेत्रों में भेजा गया है और कुछ लोगों को आर्मेनिया के रास्ते भारत लाने की व्यवस्था की गई है।
सरकार सावधानीपूर्वक नजर रख रही
जयशंकर के अनुसार इस संघर्ष का असर व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। इसलिए सरकार इन सभी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक नजर रख रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी विवाद का समाधान युद्ध से नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालने का पक्षधर है। भारत चाहता है कि सभी पक्ष संयम बरतें और क्षेत्र में शांति बहाल हो।
विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार ने पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों की मदद के लिए विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है और भारतीय दूतावास लगातार नागरिकों के संपर्क में हैं। साथ ही संकट के दौरान दूतावास और राजनयिक मिशन दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि जरूरतमंद भारतीयों को समय पर सहायता मिल सके।