(न्यूज़लाइवनाउ-Iran) ईरान के निर्वासित युवराज रेजा पहलवी ने अमेरिका में शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। इस दौरान जब उनसे भारत को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने और गहरे संबंधों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक ईरान में भारत-ईरान रिश्ते और अधिक मजबूत होंगे।
रेजा पहलवी के इस बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठा सकता है। साथ ही यह भी चर्चा तेज हो गई है कि रेजा पहलवी खुद को भविष्य में ईरान के नेतृत्व के विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं।
भारत-ईरान रिश्तों को बताया ऐतिहासिक
अपने संबोधन में रेजा पहलवी ने भारत और ईरान के संबंधों की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में दोनों राष्ट्र एक नए दौर की शुरुआत कर सकते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ईरान दौरे को याद करते हुए बताया कि उस वक्त वे बहुत छोटे थे, लेकिन वह यात्रा आज भी उनके ज़हन में है।
लोकतांत्रिक ईरान में मजबूत होंगे वैश्विक रिश्ते
ईरान में लोकतंत्र की वकालत करते हुए निर्वासित युवराज ने कहा,
“एक लोकतांत्रिक ईरान स्वाभाविक रूप से उन देशों के साथ बेहतर और स्थायी संबंध बनाएगा, जो उसकी संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे।”
उन्होंने जोर दिया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के साथ ईरान का रिश्ता भविष्य में और मजबूत हो सकता है।
शाह के दौर में पाकिस्तान के करीब था ईरान
इतिहास पर नजर डालें तो भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक संबंध हमेशा से गहरे रहे हैं। ब्रिटिश शासन के समय दोनों देश भौगोलिक रूप से भी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। हालांकि, आजादी और विभाजन के बाद यह संपर्क टूट गया।
शाह के शासनकाल में ईरान का झुकाव पाकिस्तान की ओर अधिक रहा। इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के एक लेख के अनुसार, पाकिस्तान को सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में ईरान भी शामिल था। 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान भी ईरान ने पाकिस्तान का खुला समर्थन किया था। उस समय ईरान पाकिस्तान का सबसे बड़ा वित्तीय सहयोगी भी था।
फिर सुधरने लगे भारत-ईरान रिश्ते
इसके बावजूद भारत और ईरान के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशें लगातार होती रहीं। वर्ष 1969 में ईरान के शाह और 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ईरान का दौरा किया। इन यात्राओं से दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा आई।
1974 में भारत के पहले परमाणु परीक्षण के बाद भी शाह ने भारत का दौरा किया था। इसके बाद भारत ने ईरान से तेल आयात बढ़ाया, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते और मजबूत हुए।
शाह के शासन के बाद बने इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ भी भारत के संबंध सामान्य और सहयोगपूर्ण बने रहे।
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