(न्यूज़लाइवनाउ-Nepal) नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने, खराब मौसम और जगह-जगह मलबा जमा होने से राहत एवं बचाव अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, रविवार शाम तक इस प्राकृतिक आपदा में 781 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। करीब 9,500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
भारतीय नागरिकों की तलाश और निकासी जारी
नेपाल में फंसे भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत सरकार लगातार नेपाल और चीन के अधिकारियों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रविवार शाम तक 149 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है। इसके अलावा चीन की ओर से भी कई भारतीयों को सुरक्षित नेपाल पहुंचाया गया है। महाराष्ट्र के 100 से अधिक पर्यटकों के भी स्वदेश लौटने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के अब भी लापता या संपर्क से बाहर होने की चिंता बनी हुई है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीम
नेपाल में बिगड़े हालात को देखते हुए भारत ने राहत अभियान और तेज कर दिया है। रविवार को भारतीय वायुसेना के C-130 विमान से 11 टन राहत सामग्री की चौथी खेप नेपाल भेजी गई। इसमें खोज एवं बचाव उपकरणों के साथ तकनीकी विशेषज्ञ और डीएनए पहचान में मदद करने वाले फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हैं। भारत इससे पहले भी नेपाल को मानवीय सहायता, दवाइयां और जरूरी सामान भेज चुका है।
सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना बड़ी चुनौती
बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। खासतौर पर त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग तक पहुंचने के लिए बचाव दल मलबा हटाने में जुटे हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नेपाल ने सुरंगों से लोगों को निकालने के लिए विशेष तकनीकी सहायता मांगी है। भारत की विशेषज्ञ टीम भी इस अभियान में सहयोग कर रही है।
नदियों का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा खतरा
बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। भोटेकोशी नदी का बहाव फिर बढ़ने के बाद रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जैसे इलाकों में प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है। सुनकोशी नदी का जलस्तर भी चेतावनी सीमा पार कर चुका है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
तिब्बत में भी भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के दूसरी ओर भी फ्लैश फ्लड ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। चीनी अधिकारियों के अनुसार तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 23 देशों के विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय बताए गए हैं। सीमा क्षेत्र में बाढ़ के कारण सड़क, पुल और संपर्क व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
खराब मौसम ने बढ़ाई बचाव दलों की परेशानी
राहत और बचाव कर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खराब मौसम, लगातार बारिश, उफनती नदियां और भारी मलबा है। कई स्थानों पर सड़क और पुल बह जाने के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। हेलीकॉप्टर अभियान भी मौसम की वजह से प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद नेपाली सुरक्षाबल, स्थानीय बचाव दल और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
बाढ़ के बाद अस्पतालों में घायलों और शवों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव है। कई शवों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। अधिकारियों ने डीएनए नमूने जुटाने और शवों को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था शुरू की है, ताकि लापता लोगों के परिजनों को उनकी पहचान बताई जा सके।
नेपाल में राहत अभियान अभी जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना, सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना तथा बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरी सहायता पहुंचाना है। साथ ही भारत समेत कई देश नेपाल की राहत एवं पुनर्वास प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं।