दलाईलामा ने कहा- “चीन में लाखों बौद्ध अनुयायी, लेकिन बौद्ध दर्शन से अनजान”

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली। चीन में लाखों बौद्ध अनुयायी हैं, लेकिन वे बौद्ध दर्शन और तर्क के अध्ययन पर ध्यान नहीं देते हैं। इसके विपरीत बौद्ध धर्म के भारतीय अनुयायियों ने अपने सांस्कृतिक मूल्यों और प्राचीन ज्ञान को जीवित रखा है। यह बात बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने धर्मशाला स्थित अपने आवास पर तीन दिवसीय तिब्बतियन सम्मेलन में भाग लेने आए भारतीय विद्वानों के प्रतिनिधि समूह से कही। इस दौरान धर्मगुरु ने चीन के बौद्ध भिक्षुओं सहित भारतीय बौद्ध धर्म के अनुयायियों का जिक्र किया। दलाईलामा ने कहा कि बौद्ध विज्ञान और दर्शन को शिक्षा प्रणाली में मानव मन और भावनाओं पर एक अकादमिक विषय के रूप में पेश किया जा सकता है। भारत का प्राचीन ज्ञान दुनिया के लिए बहुत उपयोगी है। अन्य देशों की मदद करने के लिए पहले इस देश में उस ज्ञान को पुनर्जीवित करना होगा। आंतरिक शांति के बिना, हम बाहरी शांति प्राप्त नहीं कर सकते। लिहाजा समस्त भारतीय अपने प्राचीन ज्ञान के महत्व को समझें। दलाईलामा ने खुद को नालंदा का छात्र बताते हुए उस समय के भारतीय स्वामी और तर्कशास्त्री मास्टर शांताशक्ति को श्रद्धांजलि दी। तीन दिवसीय सम्मेलन में तेरह विभिन्न विवि और संस्थानों के 22 प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, पीएचडी और एमफिल प्रतिभागी पहुंचे हैं। इनमें मद्रास विवि, पश्चिम बंगाल के शहीद क्षुदीराम कॉलेज, मणिपाल अकादमी ऑफ हायर एजूकेशन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास, नालंदा, दक्षिण एशियाई, दिल्ली, पंजाब और जवाहरलाल नेहरू विवि, नई दिल्ली के विवेकानंद व्यावसायिक अध्ययन संस्थान और बनारस हिंदू विवि से प्रतिभागी आए हुए हैं।

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