देशभर में जन्माष्टमी की रौनक, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब; मुंबई में दही हांडी की जोरदार तैयारी

(न्यूज़लाइवनाउ-India) देशभर में शुक्रवार, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कृष्ण मंदिरों से लेकर घरों तक भक्तिमय माहौल नजर आ रहा है। मंदिरों में विशेष पूजा, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन हो रहा है, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। 

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कृष्ण मंदिरों को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। भक्त दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो रहे हैं और मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म का उत्सव मनाने की तैयारियां कर रहे हैं। 

मुंबई में दिख रहा खास उत्साह

मुंबई में जन्माष्टमी के साथ ही दही हांडी को लेकर भी जबरदस्त उत्साह है। शनिवार, 5 सितंबर को होने वाले इस आयोजन के लिए गोविंदा मंडलियां तैयारियों में जुटी हैं। ऊंचाई पर दही और दूध से भरी मटकी बांधी जाएगी, जिसे फोड़ने के लिए गोविंदा मानव पिरामिड बनाएंगे। मुंबई के गिरगांव चौपाटी स्थित इस्कॉन मंदिर में सुबह मंगला आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। यहां लगातार श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहा। महानगर के अन्य कृष्ण मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 

सोसायटियों और घरों में भी कृष्ण भक्ति

जन्माष्टमी का उत्साह केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है। मुंबई की आवासीय सोसायटियों में भी बच्चों और बड़ों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कई घरों में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा, झूला सजाने और मध्यरात्रि जन्मोत्सव की तैयारियां की गई हैं। 

सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था भी चाक-चौबंद

दही हांडी में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका और मुंबई पुलिस ने प्रमुख आयोजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ यातायात सुचारु रखने के लिए कई स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। 

दही हांडी को भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और उनकी माखन चोरी की कथाओं से जोड़ा जाता है। समय के साथ यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ एकता, सहयोग, साहस और सामूहिक प्रयास का प्रतीक बन गया है। मानव पिरामिड में हर गोविंदा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और सभी के तालमेल से ही मटकी तक पहुंचना संभव होता है।

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