Pakistan–Afghanistan Conflict: अब पाकिस्तान को अफगानिस्तान में लोकतंत्र चाहिए! तालिबानी हमलों के बाद इस्लामाबाद का बयान जारी

(न्यूज़लाइवनाउ-Pakistan) पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर यह उम्मीद जताई है कि कभी न कभी अफगान नागरिक स्वतंत्र होंगे और एक वास्तविक लोकतांत्रिक एवं प्रतिनिधि शासन के तहत जीवन व्यतीत करेंगे।

विडंबना यह है कि वही पाकिस्तान—जो 78 वर्षों में लगभग 35 साल तक सैन्य शासन के अधीन रहा, और जहां आज भी सेना परोक्ष रूप से सत्ता की डोर थामे हुए है—अब अपने पड़ोसी देश अफगानिस्तान में लोकतंत्र की मांग उठा रहा है।

तालिबान शासन वाले अफगानिस्तान के साथ चल रहे हिंसक संघर्ष के बीच इस्लामाबाद की ओर से यह बड़ा बयान आया है। सीमा पार हुई गोलीबारी में अपने 23 सैनिकों की मौत (पाकिस्तानी दावा) के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे उम्मीद है कि “एक दिन अफगान जनता आज़ाद होगी और एक सच्चे प्रतिनिधि लोकतंत्र द्वारा संचालित होगी।”

साथ ही, इस पत्र में पाकिस्तान ने अफगान तालिबान और उससे जुड़े आतंकी गुटों की बढ़ती हिंसक गतिविधियों पर गहरी चिंता भी प्रकट की है।

विदेश मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी बयान

“हमें पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में अफगान जनता स्वतंत्र होगी और एक वैध, जन-प्रतिनिधि सरकार उनके हित में कार्य करेगी।”

पत्र में 11–12 अक्टूबर की रात पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हुई भीषण झड़पों पर भी चिंता जताई गई है और कहा गया है कि ऐसी घटनाएं “पड़ोसी सहयोग और क्षेत्रीय शांति की भावना के विपरीत” हैं।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच आखिर मामला क्या है?रविवार को पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि सीमा पर रातभर चली मुठभेड़ में उसके 23 सैनिक मारे गए, जबकि जवाबी कार्रवाई में तालिबान और उसके सहयोगी संगठनों के 200 से अधिक लड़ाके ढेर कर दिए गए।वहीं, अफगानिस्तान की ओर से विपरीत दावा किया गया है कि उनकी जवाबी कार्रवाई में 58 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत और 30 से अधिक घायल हुए हैं।दोनों देशों के बीच लगातार सीमा पार हमलों और आरोप-प्रत्यारोप के चलते तनाव चरम पर पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) बार-बार अफगान भूमि का उपयोग कर पाकिस्तान पर हमले कर रही है। इसी सिलसिले में पिछले सप्ताह खैबर पख्तूनख्वा के ओरकजई जिले में हुए हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल, एक मेजर समेत 11 सैनिकों की मौत हुई थी।इस हमले के बाद पाकिस्तान ने टीटीपी प्रमुख को निशाना बनाते हुए काबुल पर एयरस्ट्राइक की थी। इसके जवाब में तालिबान ने सीमा पर प्रतिकारात्मक हमला कर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया।

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