11 सितंबर तक बारिश का सिलसिला रहेगा जारी, बिहार में बाढ़ से 16 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

(न्यूज़लाइवनाउ-India) देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। 11 सितंबर तक कई राज्यों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी चलने की संभावना है। कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है।

पहाड़ी राज्यों में अचानक बाढ़ का खतरा

भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, चंपावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और उत्तरकाशी में अचानक बाढ़ की आशंका जताई गई है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले को भी फ्लैश फ्लड के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है।

बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई है।

बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर

बिहार में पहले से बनी बाढ़ की स्थिति पर मौसम का नया पूर्वानुमान चिंता बढ़ा रहा है। राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। बाढ़ से प्रदेश में 16 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए गए हैं।

पटना में गंगा के जलस्तर ने भी गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार गांधी घाट पर गंगा का पानी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर पहुंच गया, जिसके बाद निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। गंडक और कोसी समेत अन्य नदियों में भी उफान की स्थिति बनी हुई है।

मौसम विभाग ने बिहार में 7 से 11 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना जताई है। इससे पहले भी आईएमडी ने राज्य में भारी बारिश और गरज-चमक को लेकर चेतावनी जारी की थी।

हिमाचल में बादल फटने से परियोजना को नुकसान

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में शुक्रवार रात बादल फटने की घटना सामने आई। इसके बाद नोगली खड्ड में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। तेज बहाव के साथ आया मलबा सेरीपुल स्थित गंगाधारी जलविद्युत परियोजना के आसपास जमा हो गया, जिससे परियोजना को नुकसान पहुंचा।

बारिश और बाढ़ का असर राज्य के बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा है। कई सड़कें बंद हुई हैं, जबकि पेयजल योजनाओं और बिजली ट्रांसफार्मरों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम ने बदला रंग

उधर, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ने करवट ली है। कई ऊंची चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। गुलमर्ग, पीर पंजाल और जोजिला क्षेत्र के ऊंचे इलाकों में बर्फ की सफेद चादर दिखाई दी।

बर्फबारी के कारण पहाड़ी इलाकों में तापमान में गिरावट के साथ ठंड का असर भी बढ़ने लगा है।

मध्य भारत में भी बारिश का दौर

आईएमडी के मुताबिक पश्चिमी मध्य प्रदेश में 6 और 7 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश में 8 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बनी रहने का अनुमान है।

छत्तीसगढ़ में 8 से 11 सितंबर और विदर्भ में 11 सितंबर को व्यापक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कई इलाकों में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश का असर देखने को मिल सकता है।

बंगाल, सिक्किम और अंडमान में भी बरसेंगे बादल

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलावा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी 11 सितंबर तक व्यापक बारिश का अनुमान है। वहीं पूर्वी भारत के अन्य हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना बनी हुई है।

ओडिशा में भी 9 से 11 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां बढ़ने का पूर्वानुमान सामने आया है।

लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र कमजोर होकर अब उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के आसपास केंद्रित है। इसके अगले कुछ दिनों में पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा निचले क्षोभमंडल में दो अन्य मौसम प्रणालियां भी सक्रिय हैं। इनमें से एक दक्षिणी हरियाणा से दक्षिणी असम तक और दूसरी दक्षिणी गुजरात से उत्तरी बांग्लादेश तक फैली हुई है। इन प्रणालियों के कारण कई राज्यों में नमी और बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है।

आखिर क्यों सक्रिय है मौसम?

लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निचले इलाकों, नदी किनारे और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अचानक बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।फिलहाल मौसम विभाग का अनुमान है कि देश के कई हिस्सों में बारिश का यह दौर 11 सितंबर तक अलग-अलग तीव्रता के साथ जारी रह सकता है।

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