(एन एल एन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : रूस ने जी 7 देशों और यूरोपीय यूनियन बड़ा झटका दिया है । रूस ने 60 डॉलर प्रति बैरल की तेल मूल्य की सीमा को स्वीकार करने इनकार कर दिया है । रूसी समाचार एजेंसी TASS अनुसार, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, “हम स्थिति का आकलन कर रहे हैं । इस तरह की कैप के लिए कुछ तैयारियां की गई थीं । हम प्राइस कैप को स्वीकार नहीं करेंगे । यूरोपीय संघ रूस से आने वाले तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल मूल्य की सीमा तय करने की तैयारी कर रहा है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक बाजारों में रूस से आने वाली तेल की आपूर्ति को जारी रखने के साथ ही यूक्रेन युद्ध के लिए धन जुटाने की राष्ट्रीय व्लादिमीर पुतिन की क्षमता को कमजोर करना है। यूरोपीय संघ के राजनयिकों ने इस हालिया प्रस्ताव की पुष्टि की है। तेल की कम कीमत तय करने के लिए सोमवार की समयसीमा निर्धारित की गई है। रूस के कच्चे तेल के दाम इस हफ्ते 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चले गए थे। अब यूरोपीय संघ के इसकी सीमा 60 डॉलर प्रति बैरल तय करने पर यह मौजूदा दाम के आसपास ही होगी।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड बृहस्पतिवार को 87 डॉलर प्रति बैरल था। एक अधिकारी ने बताया कि दामों पर लगाम लगाना युद्ध को जल्द खत्म करने में मददगार होगा जबकि यदि दाम की सीमा तय नहीं की जाती है तो यह रूस के लिए फायदे वाली बात होगी। दरसअल रूस के लिए तेल वित्तीय राजस्व का एक बड़ा स्रोत है और निर्यात पाबंदियों समेत कई अन्य प्रतिबंधों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था इसी के बूते मजबूत बनी हुई है। रूस प्रतिदिन करीब 50 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है। तेल के दाम पर लगाम नहीं लगाने का वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, यदि रूस तेल का निर्यात रोक देता है तो दुनियाभर में ऊर्जा की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। हालांकि पुतिन पहले कह चुके हैं कि वह दाम की सीमा तय होने पर तेल नहीं बेचेंगे।
शुक्रवार को यूरोपीय संघ के देशों ने रूसी समुद्री तेल की कीमत 60 अमरीकी डालर प्रति बैरल पर कैप करने पर सहमति व्यक्त की । यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ट्विटर पर कहा, “तेल मूल्य कैप पर यूरोपीय संघ का समझौता, G7 और अन्य के साथ समन्वित, रूस के राजस्व को काफी कम कर देगा । यह हमें वैश्विक ऊर्जा कीमतों को स्थिर करने में मदद करेगा ।
रूसी कच्चे तेल तक पहुंच के लिए कदम
लेयेन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर वीडियो भी साझा किया जिसमें उन्होंने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं कि यूरोपीय संघ और अन्य प्रमुख जी 7 भागीदारों के पास 5 दिसंबर तक रूसी समुद्री तेल पर पूर्ण आयात प्रतिबंध होगा । लेकिन हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उभरते और विकासशील देश सीमित कीमतों पर कुछ रूसी कच्चे तेल तक पहुंच जारी रहे ।
यूरोपीय संघ के अध्यक्ष ने बताए थे उद्देश्य
इस प्रकार आज यूरोपीय संघ, जी 7 और अन्य वैश्विक भागीदारों ने रूस से समुद्री तेल पर वैश्विक मूल्य सीमा लागू करने पर सहमति व्यक्त की है ।” उद्देश्यों के बारे में बात करते हुए यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि सबसे पहले यह हमारे प्रतिबंधों के प्रभाव को मजबूत करेगा । दूसरा- यह रूस के राजस्व को कम करेगा और तीसरा- साथ ह, यह वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करेगा ।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय संघ की ओर से रूस से आने वाले कच्चे तेल के दाम तय करने का भारत पर कोई खास असर नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि जब पूरी दुनिया रूस से तेल खरीदने को तैयार नहीं थी तो भारत रूस से तेल खरीद रहा था। इस बात को रूस भी भली भांति समझ रहा है। रूस भारत को बहुत ही सस्ते दर पर तेल बेच रहा है। वह इस डील को आगे भी जारी रख सकता है। यानी तेल के दाम तय करने का भारतीय बाजार पर कोई फौरी असर नहीं होगा।