सरकार ने मानी सुरक्षा में कमी, राहुल गांधी आज करेंगे अनंतनाग का दौरा

पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने दिखाई सख्ती, विपक्ष ने दिया समर्थन

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान जाने के बाद केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाते हुए कई निर्णायक कदम उठाए हैं। इस हमले के मद्देनजर गुरुवार को दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें सरकार ने माना कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक हुई।

बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य प्रमुख दलों के नेता शामिल हुए। विपक्ष ने आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की मांग करते हुए केंद्र सरकार की किसी भी सख्त कार्रवाई को समर्थन देने की बात कही।


पाकिस्तान के खिलाफ केंद्र सरकार के सख्त कदम

सरकार ने हमले में पाकिस्तान की भूमिका को ध्यान में रखते हुए कई ठोस निर्णय लिए हैं:

  • सिंधु जल समझौते पर रोक: भारत ने पाकिस्तान को आधिकारिक तौर पर पत्र भेजकर सिंधु जल संधि को निलंबित करने की जानकारी दी है।
  • वीजा सेवाएं रद्द: पाकिस्तानी नागरिकों को दी जाने वाली वीजा सेवाएं फिलहाल के लिए स्थगित कर दी गई हैं।
  • बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी स्थगित: अटारी बॉर्डर पर प्रतिदिन होने वाली बीटिंग द रिट्रीट परेड को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है।
  • पाक नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश: भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को 27 अप्रैल तक देश छोड़ने का निर्देश जारी किया गया है।

सेना और वायुसेना अलर्ट मोड में

भारतीय वायुसेना ने ‘आक्रमण’ नाम की सैन्य अभ्यास की शुरुआत की है, जिसमें राफेल और सुखोई जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हैं। यह अभ्यास खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में एयर स्ट्राइक क्षमता को और धार देने के लिए किया जा रहा है।


राहुल गांधी का दौरा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज कश्मीर के अनंतनाग पहुंचेंगे। वहां वे आतंकी हमले में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर उनके हालचाल जानेंगे और समर्थन व्यक्त करेंगे।


अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले की तीव्र निंदा करते हुए भारत के साथ एकजुटता जताई है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में इजराइल भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।


पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाया है। सैन्य स्तर से लेकर कूटनीतिक मोर्चे तक कई कठोर कदम उठाए गए हैं। विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहयोग इस बात की ओर संकेत करता है कि अब आतंक के खिलाफ भारत की नीति पहले से कहीं ज्यादा कठोर और स्पष्ट है।

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