SC : मुआवजा नहीं भर सकता दुष्कर्म और एसिड अटैक पीड़ितों के घाव

यह याचिका एक महिला वकील ने दायर की है।योजना के अनुसार किसी महिला पर यौन हमला या एसिड अटैक होता है, तो उसे न्यूनतम 5 लाख रुपये और जान जाने पर उसके आश्रितों को 10 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यौन हमले व एसिड अटैक पीड़िताओं के मुआवजे की योजना से संबंधित मामले की सुनवाई में अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, ‘जीवन अमूल्य है, कोई भी कोर्ट उसका रुपये-पैसे की दृष्टि से आकलन नहीं कर सकती।’ जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) की मुआवजा योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की। यह याचिका एक महिला वकील ने दायर की है।योजना के अनुसार किसी महिला पर यौन हमला या एसिड अटैक होता है, तो उसे न्यूनतम 5 लाख रुपये और जान जाने पर उसके आश्रितों को 10 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है। महिला वकील ने एसिड अटैक पीड़ित के मामले में याचिका दायर की है। उसमें कहा गया है कि ऐसे पीड़ितों के मामले में मुआवजा राशि फिक्स कर दी जानी चाहिए, वह अपराध की श्रेणी के अनुसार बदलना नहीं चाहिए।वकील ने तर्क दिया कि यदि एक महिला से दुष्कर्म होता है, तो उसे मिलने वाले मुआवजे में नाल्सा की योजना के अनुसार फर्क नहीं होना चाहिए। योजना में न्यूनतम 4 लाख रुपये और अधिकतम 7 लाख के मुआवजे का प्रावधान है। उसने कहा कि दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म व मौत की घटनाओं को मुआवजे के मामले में प्रतिशतवार श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता।

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