(न्यूज़लाइवनाउ-UP) समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को रामपुर की सत्र अदालत से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। चुनावी सभा के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी के लिए कथित रूप से ‘तनखैया’ शब्द का इस्तेमाल करने से जुड़े मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर उनकी अपील अदालत ने नामंजूर कर दी। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट का फैसला यथावत रखा गया।
यह प्रकरण वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार से जुड़ा है। आरोप है कि रामपुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान आजम खान ने तत्कालीन जिलाधिकारी पर टिप्पणी करते हुए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था और उन्हें ‘तनखैया’ कहा था। इस बयान को चुनाव आचार संहिता और लोक प्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन के दायरे में मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने मई 2026 में आजम खान को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद उन्होंने इस आदेश को चुनौती देते हुए सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
बहस पूरी होने के बाद आया फैसला
अपील पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार को सुनाए गए निर्णय में सत्र न्यायालय ने आजम खान की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा।
सत्र अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब आजम खान के पास इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का कानूनी विकल्प मौजूद है। यदि वे आगे चुनौती देते हैं, तो मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में होगी।