न्यूज़लाइवनाउ : ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले की आशंका के बीच पाकिस्तान में चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। खासतौर पर पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत को लेकर डर है कि अगर ईरान में हालात बिगड़े या वहां सत्ता परिवर्तन हुआ, तो इसका सीधा असर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
अमेरिकी हमले के बढ़ते खतरे के बीच पाकिस्तान को आशंका है कि ईरान में अस्थिरता की स्थिति बनने पर बलूचिस्तान में सक्रिय विद्रोही गुट और अधिक आक्रामक हो सकते हैं। पहले से ही असुरक्षा और अलगाववादी गतिविधियों से जूझ रहे इस प्रांत में हालात और बिगड़ने का खतरा पाकिस्तान को परेशान कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पाकिस्तान के लिए कोई दूर की समस्या नहीं है। दोनों देशों के बीच करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील और अस्थिर इलाकों से होकर गुजरती है। ऐसे में ईरान में किसी भी तरह की राजनीतिक या सैन्य उथल-पुथल का असर सीमा पार तक महसूस किया जा सकता है।
ईरान में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी का कहना है कि ईरान में किसी भी तरह का बदलाव—चाहे वह सत्ता परिवर्तन हो या लंबे समय तक चलने वाली अस्थिरता—पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उनके अनुसार, ऐसे हालात में सीमा सुरक्षा, आंतरिक विद्रोह और क्षेत्रीय संतुलन सभी प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव जोहर सलीम ने याद दिलाया कि पिछली बार जब ईरान और इज़रायल के बीच तनाव बढ़ा था, तब पाकिस्तान ने खुलकर ईरान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का समर्थन किया था। यह पाकिस्तान की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें वह क्षेत्र में किसी भी तरह की टूट-फूट या अस्थिरता से बचना चाहता है।
पाकिस्तान की चिंता केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था भी खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर काफी हद तक निर्भर है। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और खाड़ी देशों में काम करने वाले पाकिस्तानी प्रवासी मजदूरों की कमाई पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है। अगर क्षेत्र में हालात और बिगड़े, तो इसका असर पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंका पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक पड़ोसी देश का संकट नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, एकता और स्थिरता से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुकी है।