(न्यूज़लाइवनाउ-Bihar) बिहार विधानसभा चुनाव में अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की औपचारिक एंट्री हो गई है। आज वे राज्य में दो जनसभाओं को संबोधित करेंगे — पहली पटना जिले के दानापुर में और दूसरी सहरसा में।
आज से योगी आदित्यनाथ का प्रचार अभियान बिहार में शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी की पहली रैली दानापुर विधानसभा सीट पर होगी, जहां वे भाजपा उम्मीदवार रामकृपाल यादव के समर्थन में मंच साझा करेंगे। वहीं, उनकी दूसरी सभा सहरसा में होगी, जहां वे डॉ. आलोक रंजन के लिए प्रचार करेंगे। सहरसा का इलाका कोशी और सीमांचल बेल्ट के निकट आता है, जहाँ मुस्लिम मतदाताओं की तादाद काफी अधिक है। ऐसे में योगी की यह एंट्री बीजेपी की रणनीतिक चाल मानी जा रही है — उद्देश्य है हिंदुत्व के मुद्दे पर अपने वोट बैंक को फिर से मजबूत करना।
गौर करने वाली बात यह है कि बीजेपी ने अब तक जारी प्रत्याशियों की सूची में किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है। एनडीए की ओर से भी अब तक कोई मुस्लिम चेहरा सामने नहीं आया है। वहीं दूसरी ओर, ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) महागठबंधन से अलग होकर मैदान में उतर चुकी है, जिससे चुनावी समीकरण और रोचक हो गए हैं।
योगी की रैलियों पर सबकी निगाहें
जैसे-जैसे बिहार चुनाव का तापमान बढ़ रहा है, बीजेपी ने अपने सबसे प्रभावशाली ‘हिंदुत्व चेहरे’ को प्रचार मैदान में उतार दिया है — योगी आदित्यनाथ। पार्टी की रणनीति के अनुसार, योगी की सभाओं को खास तौर पर सीमांचल और कोशी क्षेत्र में केंद्रित किया गया है, जहाँ धार्मिक ध्रुवीकरण का सीधा असर मतदान पर पड़ सकता है।
आज योगी आदित्यनाथ दो बड़ी सभाएं करेंगे — पहली दानापुर विधानसभा क्षेत्र में और दूसरी सहरसा में। दानापुर में वे रामकृपाल यादव के समर्थन में मतदाताओं से अपील करेंगे, जबकि सहरसा में डॉ. आलोक रंजन के लिए माहौल बनाएंगे।
सहरसा की सभा को सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सीमांचल क्षेत्र के करीब है — वही इलाका जहाँ मुस्लिम वोटरों की हिस्सेदारी अधिक है और ओवैसी की पार्टी लगातार सक्रिय है। हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार के कई जिलों में रैलियाँ की हैं और अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारे हैं। बीजेपी की कोशिश है कि योगी के भाषणों के ज़रिए अपने समर्थक वर्ग को एकजुट किया जाए और हिंदुत्व की लहर को फिर से जीवित किया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, योगी की सभाएँ केवल बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा का स्रोत नहीं हैं, बल्कि ओवैसी के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ विचारधारात्मक मुकाबले (narrative battle) का हिस्सा भी हैं।
दानापुर की सीट पर बीजेपी उम्मीदवार रामकृपाल यादव के सामने बाहुबली नेता रीतलाल यादव चुनौती बनकर खड़े हैं। यहाँ योगी की मौजूदगी को बीजेपी की ‘कानून व्यवस्था’ के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी का संदेश स्पष्ट है — अपराध और बाहुबल की राजनीति के खिलाफ सख्त प्रशासन की छवि को सामने लाना।
बिहार में 20 से ज्यादा रैलियों की योजना
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में योगी आदित्यनाथ 20 से अधिक सभाएँ बिहार में करेंगे। पार्टी मानती है कि उनकी लोकप्रियता और कठोर नेता की छवि बिहार के मतदाताओं पर असर डाल सकती है। कई उम्मीदवारों ने योगी के प्रचार की विशेष मांग की है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सीमांचल और कोशी इलाकों में योगी की मौजूदगी सिर्फ वोट बैंक को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि यह संदेश देने के लिए है कि भाजपा अपने वैचारिक एजेंडे से पीछे नहीं हट रही। पार्टी का लक्ष्य है — अपने समर्थकों को एकजुट रखना और विपक्षी ध्रुवीकरण को अपने पक्ष में मोड़ना।