(न्यूज़लाइवनाउ-Srinagar) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसक घटनाओं के बीच नियंत्रण रेखा (एलओसी) के समीप पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों में बढ़ोतरी की खबर सामने आई है। कुपवाड़ा और बांदीपोरा के गुरेज सेक्टर के सामने स्थित एथमुकाम इलाके में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों की मौजूदगी की जानकारी मिली है। रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में सैन्य जमावड़े को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से देख रही हैं।
एथमुकाम में बढ़ी सैनिकों की मौजूदगी
रिपोर्ट के मुताबिक, एलओसी के करीब स्थित एथमुकाम डिग्री कॉलेज में पाकिस्तानी सेना के जवानों की तैनाती देखी गई है। यह इलाका नीलम यानी किशनगंगा नदी के किनारे स्थित है और मुजफ्फराबाद से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर बताया जाता है।
भारतीय सीमा के बेहद करीब होने के कारण इस इलाके में अचानक बढ़ी सैन्य गतिविधि को सामान्य घटनाक्रम से अलग माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी पहुंचे मुजफ्फराबाद
इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मुजफ्फराबाद का दौरा किया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सुबह करीब 9:30 बजे वहां पहुंचकर क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया।
मुनीर का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब पीओके में सरकार और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ प्रदर्शन लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में उनके दौरे को वहां की सुरक्षा स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के आरोप
पीओके के कोटली में महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर कार्रवाई करने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी महिलाओं पर आंसू गैस और लाठीचार्ज किया गया तथा पैलेट गन के इस्तेमाल का भी दावा किया गया।
जेकेएचआरओ के अनुसार, इस कार्रवाई में करीब 50 महिलाएं घायल हुईं। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है।
मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे
पीओके में चल रहे आंदोलन में हताहतों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। जम्मू कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (जेकेएचआरओ) ने दावा किया है कि आंदोलन के दौरान 91 लोगों की मौत हुई है। संगठन के मुताबिक, इनमें से 43 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि चार मामलों का सत्यापन अभी जारी है।
जेकेएचआरओ ने यह भी दावा किया है कि सुरक्षा बलों ने करीब 200 महिलाओं को उनके घरों से हिरासत में लिया है। हालांकि, इन आंकड़ों को संगठन के दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
गिलगित-बाल्टिस्तान के छात्रों ने जताया समर्थन
पीओके में चल रहे आंदोलन को गिलगित-बाल्टिस्तान के छात्रों के एक संगठन का समर्थन भी मिला है। यूनाइटेड गिलगित-बाल्टिस्तान स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने अपने बयान में आंदोलनकारियों के साथ खड़े होने की बात कही।
संगठन का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के हजारों छात्रों का रावलाकोट और पीओके के अन्य शिक्षण संस्थानों से जुड़ाव रहा है। इसी वजह से उसने प्रदर्शनकारियों के समर्थन और पाकिस्तानी सेना की कथित कार्रवाई के विरोध का ऐलान किया है।
बढ़ते तनाव के बीच एलओसी पर निगरानी बढ़ी
पीओके में नागरिक अशांति और सुरक्षा बलों के साथ टकराव के बीच एलओसी के आसपास सैन्य गतिविधियों में वृद्धि ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया रिपोर्टों में भी पीओके में प्रदर्शन, हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बताया गया है।
फिलहाल भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सीमा के समीप होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। पीओके में आंतरिक असंतोष के बीच पाकिस्तानी सेना की तैनाती और शीर्ष सैन्य नेतृत्व की सक्रियता आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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