ईरान में चीन के एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9B की असफलता

(न्यूज़लाइवनाउ-Iran) पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान का प्रमुख वायु सुरक्षा ढांचा चीन निर्मित HQ-9B सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली अपने दावों के विपरीत प्रभावहीन साबित हुआ।

यह प्रणाली ईरान ने अपनी रक्षा मजबूत करने के लिए खरीदी थी, लेकिन तीव्र, उच्च तकनीकी मिसाइल हमलों का सामना नहीं कर सकी। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसमें तेहरान समेत कई क्षेत्रों को निशाना बनाया गया।

 इन हमलों के दौरान ईरान की वायु रक्षा प्रणालियाँ भारी दबाव में रहीं और HQ-9B ने मिसाइल मार्गों को प्रभावी ढंग से रोकने में असफलता दिखाई। 

HQ-9B की तकनीकी दावे और वास्तविकता

चीन की चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित यह सिस्टम आत्म-निहित रडार और उन्नत लक्ष्य निरूपण तकनीक रखता है, जिस पर दावा किया जाता है कि यह एक साथ कई लक्ष्य ट्रैक कर सकता है और उच्च ऊँचाई पर हवाई हमलों को रोक सकता है। 

लेकिन युद्ध के मैदान पर इसके प्रदर्शन ने इस दावे को कमजोर कर दिया है और इसके वास्तविक क्षमता पर शंकाएँ पैदा कर दी हैं।  विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों ने पहले भी कहा था कि इसी तरह के चीनी वायु रक्षा उपकरण ऑपरेशन सिंडूर के दौरान पाकिस्तान में पर्याप्त परिणाम नहीं दे पाए थे, जब भारत ने उस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान के हवाई संसाधनों को निशाना बनाया था। 

अब ईरान के मामले में भी इसी प्रणाली के असफल रहने से चीन-निर्मित एएडीएस (Air Defence System) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

यह विफलता न सिर्फ ईरान की रक्षा छवि को प्रभावित करती है, बल्कि चीनी सैन्य निर्यात और वायु रक्षा प्रौद्योगिकी की क्षमता को भी विश्व मंच पर चर्चा का विषय बना रही है। कई विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक हवाई रक्षा में केवल मिसाइल की शक्ति ही नहीं, बल्कि नेटवर्कed कमांड और सेंसर साझेदारी बहुत अहम होती है – जो HQ-9B में कमी दिखी है। 

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