(न्यूज़लाइवनाउ-Himachal Pradesh) हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में उद्योगों को नई गति देने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति-2026 लागू करने का फैसला किया है। इस नीति का मुख्य लक्ष्य राज्य में अधिक निवेश आकर्षित करना, स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाना है।
निवेशकों के लिए आसान होगा कारोबार
नई नीति के तहत उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को सरकारी मंजूरियों के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सिंगल विंडो प्रणाली को और प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे आवश्यक अनुमतियां तय समयसीमा में मिल सकें। इसके साथ ही ऑनलाइन प्रक्रियाओं को बढ़ावा देकर निवेशकों का समय और लागत दोनों कम करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार पैदा होंगे। नई नीति में ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जिनमें अधिक से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सके। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भी विशेष प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है।
हरित उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
राज्य की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। ग्रीन एनर्जी, स्वच्छ तकनीक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन आधारित उद्योगों में निवेश आकर्षित करने की रणनीति तैयार की गई है।
औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य उद्योगों को ऐसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे उत्पादन और संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए।
नई नीति केवल बड़े निवेशकों तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य के छोटे उद्यमियों, स्टार्टअप और एमएसएमई इकाइयों को भी वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और आवश्यक प्रोत्साहन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ सकें।
सरकार का कहना है कि नई औद्योगिक नीति के जरिए हिमाचल प्रदेश को निवेश के लिए अधिक आकर्षक राज्य बनाया जाएगा। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, उद्योगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और निवेशकों का विश्वास मजबूत करने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार और औद्योगिक विकास को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।