झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद: हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिर भड़का छात्रों का आक्रोश

(न्यूज़लाइवनाउ-Jharkhand) झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। राज्य सरकार की ओर से कई भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द किए जाने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक के बाद आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि सरकार ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा, जिसके कारण उनकी मांगों को झटका लगा है

दरअसल, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन करीब 26 दिनों तक चला था। इसके बाद राज्य सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने और अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का निर्णय लिया। सरकार के इस कदम से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने राहत महसूस की थी, लेकिन परीक्षा में सफल रहे उम्मीदवारों के बीच नौकरी जाने की आशंका पैदा हो गई। इनमें से कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के कुछ रद्दीकरण संबंधी आदेशों पर रोक लगा दी। इसके बाद भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों में नाराजगी फैल गई। उनका आरोप है कि सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय तो लिया, लेकिन अदालत में उस फैसले का प्रभावी तरीके से बचाव नहीं किया।

शुक्रवार को रांची में प्रदर्शनकारियों ने झारखंड लोक सेवा आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति भी बनी। हजारीबाग और गिरिडीह में भी विरोध प्रदर्शन की खबर सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार की कमजोर कानूनी पैरवी ने पूरे मामले को फिर उलझा दिया है। ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ से जुड़े नेताओं ने कहा कि अदालत में सरकार की ओर से पर्याप्त प्रभावी तरीके से पक्ष नहीं रखा गया। इसी वजह से छात्रों ने सरकार पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है।

उधर, पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन नहीं किया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी पुलिस और सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने का आरोप लगा रहे हैं।

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा ने आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए राज्य सरकार को घेरा है। विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर छात्रों के साथ बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भी प्रदर्शन के दौरान कथित कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की बात कही।

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा पर छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

इसी बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया है। प्रस्तावित यात्रा झारखंड के सभी 24 जिलों से होकर गुजरने की बात कही गई है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा तो आगे मुख्यमंत्री आवास के घेराव और व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

भर्ती परीक्षा विवाद की जांच भी आगे बढ़ रही है। सीआईडी की विशेष जांच टीम ने कथित अनियमितताओं के मामले में अब तक 37 संदिग्धों से पूछताछ की है। जांच एजेंसी ने लोगों से भी अपील की है कि यदि उनके पास परीक्षा में गड़बड़ी से संबंधित कोई जानकारी या साक्ष्य है, तो उसे जांच एजेंसी तक पहुंचाएं।

अब इस पूरे मामले की अगली अहम कड़ी हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई है। छात्रों की नजर इस बात पर है कि सरकार रद्द की गई परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े अपने फैसलों को अदालत में किस मजबूती से रखती है। फिलहाल झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद ने एक बार फिर सरकार, अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ा दिया है।

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