(न्यूज़लाइवनाउ-Tamil Nadu) तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की अनुमति प्रदान कर दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि ये नियुक्तियां फिलहाल अस्थायी (टेम्पररी) होंगी और इनकी वैधता अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन रहेगी।
यह मामला उस जनहित याचिका के बाद अदालत पहुंचा था, जिसमें सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया था कि किसी विशेष घटना के पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर सहायता के रूप में सरकारी रोजगार देने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि इससे प्रभावित परिवारों को स्थायी आजीविका का सहारा मिलेगा।
मद्रास हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरकार को नियुक्ति पत्र जारी करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन साथ ही यह शर्त भी जोड़ दी कि ये नियुक्तियां अस्थायी रहेंगी और यदि भविष्य में अदालत का अंतिम फैसला अलग दिशा में जाता है, तो उस निर्णय का पालन करना होगा।
41 लोगों की मौत
अदालत के इस आदेश के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय करूर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंप सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी सहायता जारी रखने का भरोसा भी दिया।
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में करूर में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान भीषण भगदड़ मच गई थी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस घटना की जांच अभी भी जारी है और मामले से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं पर न्यायिक प्रक्रिया चल रही है।