संसद सत्र में मिडिल ईस्ट युद्ध और CAPF बिल पर चर्चा

(न्यूज़लाइवनाउ-India) देश की संसद के बजट सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) से जुड़ा नया विधेयक प्रमुख रहे।

मिडिल ईस्ट संकट पर सरकार का रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। 

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी संबंधित देशों के संपर्क में है, ताकि हालात को बेहतर तरीके से समझा जा सके। 

ऊर्जा और व्यापार पर असर

प्रधानमंत्री ने बताया कि यह युद्ध वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा का अहम स्रोत है। साथ ही, यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी भी तरह की अस्थिरता भारत की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है। 

सरकार की ओर से यह भी भरोसा दिलाया गया कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा

सरकार ने जानकारी दी कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने और सहायता देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 

CAPF बिल पेश करने की तैयारी

संसद के इसी सत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए एक नया व्यापक कानून (CAPF बिल) पेश करने की योजना बनाई। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों को एक समान ढांचे में लाना है, ताकि विभिन्न बलों के बीच बेहतर समन्वय हो सके। 

विपक्षी नेताओं ने सरकार से इस मुद्दे पर अधिक व्यापक चर्चा और सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की। उनका कहना है कि यह संकट पूरे देश से जुड़ा है, इसलिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक रणनीति बनानी चाहिए।

वैश्विक चिंता और भारत की भूमिका

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। ऐसे में भारत की नीति और प्रधानमंत्री का बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि देश के हितों की रक्षा करते हुए स्थिति का संतुलित तरीके से सामना किया जाए।

 संसद के इस सत्र में साफ तौर पर यह दिखा कि मिडिल ईस्ट का संकट केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा जरूरतों और नागरिकों की सुरक्षा से है। वहीं, CAPF बिल के जरिए आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाया जा रहा है।

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