(न्यूज़लाइवनाउ-India) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लगातार सबसे लंबे निर्वाचित कार्यकाल का नया कीर्तिमान स्थापित करने के बाद कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास केवल निस्वार्थ सेवा, समर्पण और जवाबदेही से ही अर्जित किया जा सकता है।
उन्होंने जनसेवा को सुशासन की सबसे बड़ी परीक्षा बताते हुए कहा कि उनकी सरकार का मूल उद्देश्य देशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना रहा है।
10 जून 2026 को नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। मोदी ने 4,399 दिनों का निरंतर कार्यकाल पूरा कर यह उपलब्धि हासिल की, जबकि नेहरू ने 4,398 दिनों तक निर्वाचित सरकार के मुखिया के रूप में सेवा दी थी।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें देशवासियों द्वारा दिए गए विश्वास और समर्थन से निरंतर प्रेरणा मिलती रही है। उन्होंने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। तकनीक आधारित शासन व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री को इस उपलब्धि पर बधाई दी। राजनाथ सिंह ने उन्हें राष्ट्रहित को सर्वोच्च मानने वाला कर्मयोगी बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने विकास, जनकल्याण और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री की इस उपलब्धि पर कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों ने भी शुभकामनाएं भेजीं। विभिन्न देशों के नेताओं ने भारत की प्रगति, वैश्विक मंचों पर उसकी बढ़ती भूमिका और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की।
भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के शासनकाल को विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, सामाजिक कल्याण और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा। वहीं विपक्षी दलों ने सरकार के कामकाज को लेकर अपनी अलग राय व्यक्त करते हुए कई मुद्दों पर सवाल भी उठाए।
प्रधानमंत्री मोदी का यह रिकॉर्ड भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि वे लगातार तीन कार्यकाल तक देश का नेतृत्व करते हुए सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने हैं।